
बसंत पंचमी हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवी सरस्वती को समर्पित होता है। देवी सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता की प्रतीक हैं। मान्यता है कि मां शारदा की पूजा करने से मन स्थिर होता है और ज्ञान बढ़ता है। संगीत, कला और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए यह दिन खास महत्व रखता है।
देवी सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सरस्वती का प्राकट्य माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था। इसी कारण इस दिन को उनका जन्मोत्सव भी माना जाता है। जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आता है, लोग पूजा की सही तारीख और शुभ समय की जानकारी लेते हैं, क्योंकि इस दिन मुहूर्त का विशेष महत्व होता है।
साल 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी की रात 1:46 बजे तक रहेगी। तिथि पूरे दिन रहने के कारण लोग पूजा का सही मुहूर्त देखते हैं।
सरस्वती पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा। इस समय पूजा करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है।
बसंत पंचमी को वसंत ऋतु की शुरुआत माना जाता है। यह मौसम में बदलाव का संकेत देती है। इस पर्व का संबंध मदनोत्सव से भी है और कुछ परंपराओं में इसी दिन रतिकाम महोत्सव की शुरुआत होती है।
यह दिन कई शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है, इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन पढ़ाई की शुरुआत, नया काम शुरू करना, मुंडन, अन्नप्राशन, गृह प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण संस्कार करना शुभ माना जाता है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)
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