होली इस साल 4 मार्च को मनाई जाएगी। देशभर में यह रंगों का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। होली को अलग-अलग जगहों पर फगुआ, धुलेंडी, धुलिवंदन और डोल भी कहा जाता है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, इसके बाद ही रंगों की होली खेली जाती है।
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस बार होलिका दहन पर भद्रा काल का साया रहेगा। हिंदू धर्म में भद्रा को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य या पूजा नहीं की जाती। इसलिए होलिका दहन भद्रा समाप्त होने के बाद ही किया जाता है।
होलिका दहन पर भद्रा काल
- इस साल भद्रा काल 3 मार्च को रात 1:25 बजे से सुबह 4:30 बजे तक रहेगा।
- इस दौरान होलिका पूजा या दहन करना वर्जित होता है।
- भद्रा पूंछ: 1:25 AM से 2:35 AM
- भद्रा मुख: 2:35 AM से 4:30 AM
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन का शुभ समय 3 मार्च को शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान कभी भी होलिका दहन किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता है कि होलिका दहन नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करता है और सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। यह पर्व प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। इसे पहले ‘होलोका’ कहा जाता था और कुछ ग्रंथों में ‘हुताशनी’ नाम भी मिलता है। यह दिन भक्त प्रह्लाद की हिरण्यकश्यप और होलिका पर विजय की याद में मनाया जाता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)