Makar Sankranti kab hai: मकर संक्रांति नजदीक आने पर कई भक्तों के मन में यह सवाल है कि मकर संक्रांति 2026 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को। द्रिक पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस साल देशभर में मकर संक्रांति को 15 जनवरी को मनाने का कोई बदलाव नहीं है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को दिन में ही सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। दिल्ली और उज्जैन जैसे शहरों में संक्रांति का समय लगभग दोपहर 2:43 बजे से 3:06 बजे के बीच रहेगा। कुछ पंचांगों में इसमें थोड़ा अंतर बताया गया है, जैसे 2:49 बजे से 3:13 बजे तक।
क्योंकि संक्रांति का समय दिन में पड़ रहा है, इसलिए स्नान, दान, सूर्य पूजा और अन्य धार्मिक कार्य 14 जनवरी को ही किए जाएंगे। इस दिन पुण्य काल को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
महा पुण्य काल (Maha Punya Kaal)
महा पुण्य काल को गंगा स्नान और धार्मिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को ये समय सबसे शुभ हैं:
क्या है स्नान-दान का शुभ मुहूर्त?
इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचांग की गणना के अनुसार इस दिन पुण्य काल सुबह 9:03 बजे से शाम 5:46 बजे तक रहेगा, जबकि महा पुण्य काल सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक निर्धारित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ समयों में स्नान और दान करने से नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
मकर संक्रांति 2026 का शुभ संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, साथ ही षटतिला एकादशी का व्रत भी रहेगा। यह दुर्लभ संयोग अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इस अवसर पर गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन सूर्य देव और श्रीहरि विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और पितरों की आत्मा को भी तृप्ति मिलती है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का दान विशेष फलदायी माना गया है, जिससे सूर्य से संबंधित दोषों में कमी आती है। इसके अतिरिक्त खिचड़ी, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान करने से आर्थिक कठिनाइयां दूर होती हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है। इस पावन पर्व पर सूर्य उपासना, पवित्र स्नान और भगवान विष्णु को तिल से बने भोग अर्पित करने से जीवन की बाधाएँ कम होती हैं और व्यक्ति का जीवन अधिक सुखद और संतुलित बनता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)