
Margashirsha Amavasya 2025: अमावस्या, जो हर महीने कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन होती है, पितरों को समर्पित एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। मार्गशीर्ष अमावस्या धार्मिक ग्रंथों में अत्यंत शुभ मानी गई है क्योंकि यह धन, समृद्धि और पितरों की तृप्ति से विशेष रूप से जुड़ी होती है।
मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को यह अमावस्या पड़ती है। इस वर्ष 19 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन कुछ खास उपाय करने से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
1. प्रातःकाल स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। अगर नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर नहाते समय पानी में कुछ बूंदें गंगाजल मिला लें। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करें।
2. रात में तिल का दीपक जलाएं: सूर्यास्त के बाद घर में किसी शांत स्थान पर या तुलसी के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय शनि ग्रह के कष्ट कम करने के साथ-साथ भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। इससे घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है।
3. पीपल के पेड़ की पूजा: अमावस्या की शाम स्नान करने के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद पेड़ की परिक्रमा करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। माना जाता है कि इससे पितृदोष दूर होता है और पितरों की कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
4. भगवान विष्णु की पूजा: अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भी धन और सफलता की प्राप्ति होती है। भगवान की मूर्ति या चित्र पर पंचामृत से अभिषेक करें और तुलसी पत्र, पीले फूल, चंदन और मिठाई चढ़ाएं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या श्री विष्णु के 108 नामों का जप करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा और धन लाभ के अवसर बढ़ते हैं।
5. आटे का दीपक बहते जल में प्रवाहित करें: रात के समय आटे का दीपक बनाकर या मिट्टी के दीपक में घी या तिल का तेल डालकर जलाएं। इसे किसी पवित्र नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दें। यह उपाय मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है। इससे सौभाग्य बढ़ता है, दुख दूर होते हैं और धन के नए रास्ते खुलते हैं।
मार्गशीर्ष अमावस्या को मृगशिरा अमावस्या भी कहा जाता है। इस महीने को अगहन और मागसर नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। ग्रंथों के अनुसार यह महीना विशेष रूप से भगवान कृष्ण की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान कृष्ण ने स्वयं को सभी महीनों में मृगशिरा बताया है।
इस दिन लोग पितरों को सम्मान देते हैं। गंगा घाटों पर स्नान, पिंडदान और पितृ तर्पण किया जाता है। माना जाता है कि पितृ तर्पण करने वालों को पितरों की शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भजन, कीर्तन, दान और धार्मिक कार्य करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.