मेष संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नौ ग्रहों का राजा माना जाता है और मेष वह राशि है जिसमें सूर्य उच्च (सबसे शक्तिशाली) होता है।
मेष संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं अप्रैल में मेष संक्रांति कब है और इस दिन क्या करना शुभ होता है।
मेष संक्रांति कब है?
पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल सुबह 6:22 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल सुबह 7:33 बजे से 11:44 बजे तक है। यह समय स्नान और दान के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
मेष संक्रांति के दिन क्या करें?
दान करें
मेष संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन अन्न दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। कपड़े, भोजन, पैसे और फल दान करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसके अलावा गेहूं, पीले वस्त्र, हल्दी और चने की दाल दान करना भी शुभ होता है। तिल, पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, पंखा, गुड़ और सत्तू का दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
स्नान करें
इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इससे जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर नहाते समय पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
सूर्य देव की पूजा करें
मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा जरूर करें। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और सूर्य को जल अर्पित करें। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और रोग दूर होते हैं। तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें कुमकुम और लाल फूल डालें और सूर्य देव को अर्पित करें। जल चढ़ाते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)