Papamochani Ekadashi 2026: कब है पापमोचनी एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम और आध्यात्मिक महत्व

पापमोचनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र व्रत है। इस साल यह व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। व्रत का पारण 16 मार्च को सुबह 6:30 से 8:54 बजे के बीच करना शुभ माना गया है।

Manali Rastogi
अपडेटेड9 Mar 2026, 08:28 AM IST
पापमोचनी एकादशी
पापमोचनी एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। पूरे साल में कुल 24 एकादशी होती हैं। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है, जिसे बहुत विशेष माना जाता है। वैसे तो हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।

पापमोचनी एकादशी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च 2026 को सुबह 8:10 बजे शुरू होगी और 15 मार्च 2026 को सुबह 9:16 बजे समाप्त होगी। चूंकि व्रत में उदया तिथि का महत्व होता है, इसलिए पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा।

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पापमोचनी एकादशी 2026 पारण का समय

एकादशी व्रत का पूरा फल पाने के लिए द्वादशी तिथि में व्रत का पारण (व्रत खोलना) करना जरूरी माना जाता है। साल 2026 में पापमोचनी एकादशी का पारण 16 मार्च को सुबह 6:30 बजे से 8:54 बजे के बीच किया जा सकता है। इस समय व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि

इस दिन भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थान पर स्नान करना अधिक शुभ माना जाता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

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इसके बाद घर के मंदिर या किसी मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में गंगाजल, चंदन, रोली, हल्दी, फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान पापमोचनी एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।

पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी अपने नाम के अनुसार ही फल देती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पाप दूर हो जाते हैं। जो लोग श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत रखते हैं, उन पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। इससे जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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