Phalguna Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या कल, जानिए इस दिन क्या करें और क्या नहीं, क्या है अमावस्या का महत्व

फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि 16 फरवरी शाम 5:34 बजे शुरू होकर 17 फरवरी शाम 5:30 बजे तक रहेगी। इस दिन व्रत, तर्पण, श्राद्ध और पवित्र नदियों में स्नान शुभ माना जाता है। भगवान शिव का अभिषेक और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि मिलती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड16 Feb 2026, 03:43 PM IST
फाल्गुन अमावस्या
फाल्गुन अमावस्या(PTI)

सनातन धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना बहुत शुभ माना जाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इस दिन नदी में स्नान करना बहुत पुण्यदायक माना गया है। आइए जानते हैं इस साल फाल्गुन अमावस्या की तिथि और समय।

फरवरी 2026 में अमावस्या कब है?

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी और 17 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार यह अमावस्या मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

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फाल्गुन अमावस्या का महत्व

मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में देवी-देवताओं का निवास होता है। इसलिए इन नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह अमावस्या सुख, धन और सौभाग्य में वृद्धि करने वाली मानी जाती है। यह हिंदू पंचांग की अंतिम अमावस्या भी है।

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इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा और तर्पण करना बहुत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार या शनिवार को पड़ती है, तो उसका महत्व सूर्य ग्रहण से भी अधिक माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या के दिन क्या करें?

इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को दान दें। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों को याद करें। इसके बाद पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इस दिन भगवान शिव को दूध, दही और शहद से अभिषेक करें तथा काले तिल अर्पित करें।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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