Phalguna Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या कब है? जानें सही तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

फाल्गुन अमावस्या 2026 में 17 फरवरी को है। इस दिन स्नान, दान, तर्पण और श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए पिंडदान किया जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:35 से 6:25 तक शुभ है। इससे पितरों का आशीर्वाद, सुख और समृद्धि मिलती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड11 Feb 2026, 02:03 PM IST
फाल्गुन अमावस्या 2026
फाल्गुन अमावस्या 2026

हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन पवित्र स्नान, दान और पितरों के लिए तर्पण करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। फाल्गुन महीने में पड़ने वाली अमावस्या को खास तौर पर पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, पूजा और तर्पण करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

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यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो, तो अमावस्या के दिन पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करना लाभकारी माना जाता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों पर पितरों की कृपा होती है, उनके जीवन में परेशानियां कम आती हैं। आइए जानते हैं कि साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या कब है और स्नान-दान का शुभ समय क्या है।

फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि

साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 16 फरवरी नहीं, बल्कि 17 फरवरी को है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन, काले तिल और कपड़े दान करना चाहिए। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं। फाल्गुन अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष मिलता है।

फाल्गुन अमावस्या 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे से शुरू होगी और 17 फरवरी को सुबह 5:30 बजे समाप्त होगी।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:35 बजे से 6:25 बजे तक – स्नान और दान के लिए शुभ समय।

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:37 बजे से 1:23 बजे तक – यह भी स्नान और दान के लिए शुभ माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन पितर धरती पर आकर अपने वंशजों द्वारा दिए गए दान और तर्पण को स्वीकार करते हैं।

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ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें जीवन में बार-बार रुकावटें, आर्थिक परेशानियां और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फाल्गुन अमावस्या पर किए गए उपाय बहुत शुभ माने जाते हैं। इस तरह, फाल्गुन अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का एक उत्तम अवसर है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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