सनातन धर्म में सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। माघ महीने में मनाई जाने वाली रथ सप्तमी सूर्य उपासना का विशेष पर्व है। इसे अचला सप्तमी और सूर्य जयंती भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव अपने दिव्य रथ पर सवार होकर पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। इसलिए यह पर्व ऊर्जा, अनुशासन और सामाजिक सम्मान से जुड़ा माना जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय स्नान, सूर्य को अर्घ्य, दान और व्रत का विशेष महत्व होता है।
रथ सप्तमी का धार्मिक महत्व
रथ सप्तमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इसे माघी सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्य जयंती और महाती सप्तमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि सृष्टि की शुरुआत में इसी दिन सूर्य की पहली किरणें पृथ्वी पर पड़ी थीं।
पद्म पुराण और भविष्य पुराण जैसे ग्रंथों में इस व्रत का महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से सूर्य पूजा करने से पुराने कर्मों का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्पष्टता, शक्ति और संतुलन आता है।
रथ सप्तमी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल सप्तमी तिथि
- आरंभ: 24 जनवरी 2026, रात 12:40 बजे
- समाप्ति: 25 जनवरी 2026, रात 11:11 बजे
उदय तिथि के अनुसार रविवार, 25 जनवरी 2026 को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। रविवार सूर्य देव को समर्पित दिन माना जाता है, इसलिए यह दिन विशेष फलदायी है।
एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते
अर्घ्य देते समय ये गलतियां न करें
- बिना स्नान के अर्घ्य न दें
- पूजा के समय चप्पल या जूते न पहनें
- जल सीधे पैरों पर न गिरे, नीचे पात्र रख सकते हैं
- पूजा जल्दबाजी या लापरवाही से न करें
- बचे हुए जल को फेंकने के बजाय किसी पौधे की जड़ में डालें
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)