रविदास जयंती 2026 रविवार, 1 फरवरी को मनाई जाएगी। यह भक्ति आंदोलन के महान संत गुरु रविदास की 649वीं जयंती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व माघ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
गुरु रविदास कौन थे?
गुरु रविदास (1377–1527 ई.) भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। उन्हें रैदास, रोहिदास और रुहिदास के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने भजनों और शिक्षाओं के माध्यम से समानता, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश दिया और जाति-भेद का विरोध किया। उनके कई पद सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं।
जन्म और ऐतिहासिक मतभेद
इतिहासकारों के अनुसार गुरु रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मंधुआडीह में हुआ था। कुछ विद्वान उनका जन्म वर्ष 1377 ई. मानते हैं, जबकि कुछ 1399 ई. बताते हैं। हालांकि मान्यता है कि उनका जन्म माघ पूर्णिमा को हुआ, इसलिए हर साल इसी दिन रविदास जयंती मनाई जाती है।
जानिए रविदास जयंती का महत्व
यह दिन गुरु रविदास की शिक्षाओं (भक्ति, समानता, विनम्रता और सामाजिक सद्भाव) को याद करने के लिए समर्पित है। इस अवसर पर विशेष प्रार्थनाएं, कीर्तन और सत्संग आयोजित होते हैं। उनका जन्मस्थल श्री गुरु रविदास जन्म स्थान आज एक प्रमुख तीर्थ है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति सभी भेदभाव से ऊपर होती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)