Ekadashi Kab Hai: कब है सफला एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा

सफला एकादशी 2025 15 दिसंबर को है। इस दिन भक्त भगवान अच्युत की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और पारंपरिक पूजा विधि का पालन करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सफलता, आशीर्वाद और कठिनाइयों से छुटकारा मिलता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड10 Dec 2025, 06:22 PM IST
Ekadashi Kab Hai: कब है सफला एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा
Ekadashi Kab Hai: कब है सफला एकादशी? जानिए तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा

Ekadashi in December 2025: सनातन धर्म में सफला एकादशी का बहुत विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान अच्युत (श्रीविष्णु) की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत करने से हजार अश्वमेध यज्ञ करने से भी अधिक फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि यह व्रत सभी पापों को मिटा देता है और मन की सभी इच्छाएं पूरी करता है।

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माना जाता है कि हजारों वर्षों की कठोर तपस्या का फल केवल इस व्रत को करने से ही मिल सकता है। यह व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर कर भाग्य के द्वार खोलने वाला माना गया है। इस दिन मंदिरों में तथा तुलसी के पौधे के नीचे दीपदान करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।

जानिए तिथि व समय

  • सफला एकादशी – 15 दिसंबर 2025, सोमवार
  • व्रत पारण का समय – सुबह 07:07 बजे से 09:11 बजे तक
  • द्वादशी तिथि समाप्त – रात 11:57 बजे
  • एकादशी तिथि प्रारंभ – 14 दिसंबर 2025 शाम 06:49 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – 15 दिसंबर 2025 रात 09:19 बजे

जानिए पूजा विधि

इस दिन भगवान अच्युत की विधिवत पूजा की जाती है। सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान को धूप, दीप, फल, पंचामृत आदि अर्पित करें।

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नारियल, सुपारी, आंवला, अनार और लौंग आदि से पूजन करें। रात में भगवान श्रीहरि के भजन-कीर्तन करें। अगले दिन व्रत खोलते समय पहले किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें, फिर स्वयं पारण करें।

सफला एकादशी की पौराणिक कथा

प्राचीन समय में चम्पावती नामक नगरी में राजा महीष्मत शासन करते थे। उनके चार पुत्र थे, जिनमें से एक का नाम लुक था। वह बहुत दुष्ट और पापी स्वभाव का था। वह अपने पिता की संपत्ति बुरे कामों में नष्ट कर देता था। एक दिन राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया।

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कुछ समय बाद लुक तीन दिनों तक भूखा रहा और भटकते-भटकते एक ऋषि की कुटिया पर पहुंचा। उस दिन संयोग से सफला एकादशी थी। ऋषि ने उसे भोजन दिया। ऋषि की दया से उसका हृदय बदल गया। वह पश्चाताप करते हुए ऋषि के चरणों में गिर पड़ा।

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ऋषि ने उसे अपना शिष्य बना लिया और धीरे-धीरे उसका स्वभाव उत्तम हो गया। वह नियमित रूप से एकादशी का व्रत करने लगा। अंत में ऋषि ने अपना असली स्वरूप दिखाया, वह उसके पिता ही थे। इसके बाद लुक ने राज्य का संचालन सम्भाला और जीवनभर सफ़ला एकादशी का व्रत करता रहा।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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