Som Pradosh Vrat 2026: 16 या 17 मार्च....कब है सोम प्रदोष व्रत? जानें त्रयोदशी तिथि का समय, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि

मार्च 2026 में दूसरा सोम प्रदोष व्रत 16 मार्च को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि 16 मार्च सुबह 9:41 से 17 मार्च सुबह 9:24 तक रहेगी। शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाएगी। इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड9 Mar 2026, 03:55 PM IST
सोम प्रदोष व्रत
सोम प्रदोष व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार लगभग हर महीने में कई व्रत और त्योहार आते हैं। कुछ व्रत शांत तरीके से निकल जाते हैं, जबकि कुछ का धार्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। प्रदोष व्रत भी ऐसा ही एक व्रत है, जो भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

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आमतौर पर प्रदोष व्रत एक चंद्र मास में दो बार आता है। एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में, दोनों ही त्रयोदशी तिथि को। हालांकि कभी-कभी चंद्रमा की गति के कारण पंचांग में थोड़ा बदलाव हो जाता है। मार्च 2026 ऐसा ही महीना है, जब इस महीने में प्रदोष व्रत तीन बार पड़ रहा है। इसी कारण यह महीना शिव भक्तों के लिए खास माना जा रहा है।

मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार मार्च 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत सोमवार, 16 मार्च को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि के समय के आधार पर ही व्रत का दिन तय होता है।

त्रयोदशी तिथि का समय

  • शुरू: 16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से
  • समाप्त: 17 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक

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क्योंकि प्रदोष काल की संध्या 16 मार्च को इस तिथि के भीतर पड़ रही है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा। चूंकि यह तिथि सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोमवार का दिन पहले से ही भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत को बहुत शुभ माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय

दिन में कुछ समय ऐसे होते हैं जिन्हें पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 10 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक
  • सुबह का शुभ समय: सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक
  • प्रदोष काल पूजा समय: शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 44 मिनट तक

अधिकतर भक्त शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस समय दीपक जलाकर, मंत्रों का जाप करके और भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है।

प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। सनातन धर्म के ग्रंथों में प्रदोष काल को शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक समय बताया गया है। इस व्रत से जुड़ी कुछ प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं।

  • इस व्रत से दांपत्य जीवन में सुख और शांति आती है
  • भक्त परिवार और संतान के लिए आशीर्वाद की कामना करते हैं
  • प्रदोष काल में पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है
  • शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है

कई भक्तों के लिए यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति भक्ति और आत्मचिंतन का अवसर भी होता है।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा सामान्य और भक्तिभाव से की जाती है। व्रत रखने वाले भक्त नीचे बताए गए आसान चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और भगवान शिव के सामने व्रत रखने का संकल्प लें
  • घर के मंदिर को साफ करें और शाम की पूजा के लिए तैयारी करें
  • दोष काल में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और कच्चा गाय का दूध अर्पित करें
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा पढ़ें या प्रदोष व्रत कथा सुनें
  • घी का दीपक जलाकर आरती करें और पूजा में हुई किसी गलती के लिए क्षमा मांगें
  • कई भक्त अपनी क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं

भगवान शिव के भक्तों के लिए सोम प्रदोष व्रत का पालन करना आशीर्वाद प्राप्त करने, व्रत के माध्यम से अनुशासन का अभ्यास करने और भक्ति में समय बिताने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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