Abdul Basit Controversy: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलने का मामला सामने आया है। एक टीवी शो के दौरान पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने बेहद भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान पर अमेरिका की ओर से कोई आंच आती है, तो उसे 'डिफॉल्ट मूव' के तौर पर भारत के दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों को निशाना बनाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की जड़ अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड का वह बयान है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को अमेरिका के लिए खतरा बताया था। गबार्ड ने 2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट में कहा कि पाकिस्तान ऐसी मिसाइलें (ICBMs) विकसित कर रहा है जो सीधे अमेरिकी धरती तक मार कर सकती हैं।
गबार्ड को बताया एंटी-पाकिस्तान
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल बासित ने गबार्ड को भारतवंशी बताते हुए उनके नजरिए को पक्षपाती करार दिया। अब्दुल बासित ने गबार्ड पर “एंटी-पाकिस्तान” नजरिया रखने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता भारत को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि अमेरिका भारत की मिसाइल क्षमता पर उस तरह बात नहीं करता, क्योंकि वॉशिंगटन और नई दिल्ली रणनीतिक साझेदार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बासित ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान को कम से कम इतनी रेंज जरूर चाहिए कि वह इजरायल को भी निशाना बना सके। बासित का कहना था कि अमेरिका भारत की अग्नि-5 और अग्नि-6 मिसाइलों पर तो चुप रहता है, लेकिन पाकिस्तान के प्रोग्राम पर उंगली उठाता है।
"मुंबई और दिल्ली को बनाओ निशाना"
बासित, जो भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर रह चुके हैं, उन्होंने चर्चा के दौरान मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति (Worst-case scenario) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कभी अमेरिका या इजरायल पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर हमला करते हैं, तो पाकिस्तान को बिना वक्त गंवाए मुंबई और नई दिल्ली पर हमला कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा, "अगर कोई हम पर बुरी नजर डालता है, तो हमें दो बार नहीं सोचना चाहिए। मुंबई और दिल्ली कहीं नहीं जा रहे, वे पास ही हैं। हमें उनके लिए इंटर-कॉन्टिनेंटल मिसाइलों की जरूरत नहीं है, हम यहीं से मार करेंगे।"
बयान पर इतना शोर क्यों मचा?
मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह बात किसी अनजान पैनलिस्ट ने नहीं, बल्कि भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके एक वरिष्ठ पूर्व राजनयिक ने कही। आम तौर पर राजनयिकों से संतुलित और जिम्मेदार भाषा की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बयान में उल्टा भारतीय शहरों पर हमले जैसी बात खुलकर कही गई। यही वजह है कि इसे उकसाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना बताया जा रहा है।
26/11 की यादें हुईं ताजा
इस बातचीत का सबसे शर्मनाक हिस्सा वह था जब शो के एंकर ने बासित की बातों में सुर मिलाते हुए कहा, "हमने पहले एक ट्रेलर दिखाया है।" इस पर शर्मिंदगी जताने के बजाय बासित ने सहमति देते हुए कहा, "हमने पहले भी किया है, हम यही से फिर करेंगे।" एंकर के इस बेहद संवेदनशील टिप्पणी को 26/11 मुंबई हमले की यादों से जोड़कर देखा जा रहा है।