Who Is Albinder Dhindsa: कौन हैं अल्बिंदर ढिंडसा जो संभालेंगे जोमैटो की कमान, दीपिंदर गोयल से है खास रिश्ता!

Who is Albinder Dhindsa: Eternal Ltd. में बड़ा बदलाव हुआ है। दीपिंदर गोयल ने सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है और अब वे कंपनी में वाईस चेयरमैन रहेंगे। इसी के साथ अब इटर्नल की कमान ब्लिंकिट के फाउंडर अल्बिंदर ढिंडसा नए ग्रुप सीईओ बने हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड21 Jan 2026, 06:40 PM IST
कौन हैं इटर्नल लिमिटेड के नए सीईओ अल्बिंदर ढिंडसा?
कौन हैं इटर्नल लिमिटेड के नए सीईओ अल्बिंदर ढिंडसा?(X)

Who is Albinder Dhindsa: भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव हुआ है। Eternal Ltd. के ग्रुप सीईओ दीपिंदर गोयल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वे कंपनी के वाइस चेयरमैन के रूप में लंबी रणनीति और भविष्य की दिशा पर ध्यान देंगे। उनकी जगह कंपनी की कमान संभाल रहे हैं उनके पुराने दोस्त और Blinkit के CEO अल्बिंदर ढिंडसा।

दीपिंदर गोयल ने क्यों दिया इस्तीफा

दीपिंदर गोयल ने कंपनी को 18 साल पहले जोमैटो के रूप में शुरू किया था और इसे आज मल्टी-बिजनेस ग्रुप बनाया। उन्होंने स्टेकहोल्डर्स को लिखे एक पत्र में साफ किया कि वह इटर्नल की लंबी अवधि की रणनीति पर फोकस करना चाहते हैं। जोमैटो के शुरुआती दिनों से लेकर आज एक मल्टी-बिजनेस ग्रुप बनने तक, उन्होंने कंपनी को दिशा दी है। अब सीईओ की जिम्मेदारी छोड़कर वह बोर्ड में रहेंगे और बड़े फैसलों व भविष्य की प्लानिंग पर ध्यान देंगे। उन्होंने पत्र में ढिंडसा को इटर्नल का नया सीईओ घोषित किया।

कौन हैं अल्बिंदर ढिंडसा?

अल्बिंदर ढिंडसा कोई बाहरी नाम नहीं हैं। वे ब्लिंकिट के फाउंडर और सीईओ रहे हैं। इसके अलावा अल्बिंदर, दीपिंदर गोयल के पुराने दोस्त भी हैं। ब्लिंकिट को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में बदलने का श्रेय उन्हीं को जाता है। अब वही अनुभव इटर्नल के पूरे इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने में काम आएगा।

पढ़ाई से लेकर लीडरशिप तक का सफर

अल्बिंदर ढिंडसा ने 2000 से 2004 के बीच आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए पूरा किया। यहां उन्होंने स्ट्रैटेजी, फाइनेंस और लीडरशिप की गहरी समझ हासिल की।

स्टार्टअप से पहले कॉरपोरेट सीख

स्टार्टअप शुरू करने से पहले ढिंडसा ने कंसल्टिंग और फाइनेंस में काम किया है। URS कॉर्पोरेशन और कैंब्रिज सिस्टमैटिक्स जैसी कंपनियों में उन्होंने प्लानिंग और ऑपरेशंस सीखे। इसके बाद UBS इन्वेस्टमेंट बैंक में काम कर उन्होंने इंटरनेशनल फाइनेंस को करीब से समझा। भारत लौटने पर उन्होंने जोमैटो में इंटरनेशनल ऑपरेशंस संभाले और कंपनी को नए देशों में विस्तार दिलाया।

2014 में ढिंडसा ने ब्लिंकिट (तब ग्रोफर्स) की नींव रखी। ग्रॉसरी और जरूरी सामान की फटाफट डिलीवरी का आइडिया उस वक्त नया था। करीब 12 सालों में ब्लिंकिट ने ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और स्पीड में अपनी मजबूत पहचान बना ली।

स्टार्टअप से अब आगे स्केल-अप तक

इस बदलाव के साथ एक संकेत साफ है- जोमैटो वाला स्टार्टअप दौर अब पीछे छूट चुका है। इटर्नल अब स्केल-अप फेज में प्रवेश कर रहा है, जहां फोकस ग्रोथ के साथ-साथ ऑपरेशनल मजबूती पर होगा। दीपिंदर गोयल की स्ट्रैटेजिक सोच और अल्बिंदर ढिंडसा की ग्राउंड-लेवल एक्सीक्यूशन मिलकर कंपनी को अगली ऊंचाई तक ले जाने की तैयारी में हैं।

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