Chhath Puja 2025: छठ महापर्व पर क्यों की जाती है छठी मइया की पूजा? जानिए महत्व

छठ महापर्व का आयोजन कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होता है। इस बार यह 25 से 28 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है। सूर्य देव की पूजा के साथ-साथ छठी मइया की पूजा भी बच्चों की रक्षा और लंबी उम्र के लिए की जाती है।

Manali Rastogi
अपडेटेड28 Oct 2025, 05:54 AM IST
Chhath Puja 2025: छठ महापर्व पर क्यों की जाती है छठी मइया की पूजा? जानिए महत्व
Chhath Puja 2025: छठ महापर्व पर क्यों की जाती है छठी मइया की पूजा? जानिए महत्व

छठ पर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक महीने की अमावस्या के बाद शुरू होता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष छठ पूजा 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाई जा रही है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मइया की उपासना को समर्पित है।

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ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव के बिना पृथ्वी पर जीवन असंभव है। इसलिए, छठ महापर्व के दौरान सूर्य देव को अर्घ्य देकर लोग उनके जीवनदायी प्रकाश के लिए आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही, छठी मइया की पूजा परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों की लंबी उम्र के लिए की जाती है।

छठी मइया कौन हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी देवी सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं। इसलिए सूर्य देव और छठी मइया की पूजा एक साथ की जाती है। छठ पूजा आमतौर पर नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय के किनारे खड़े होकर की जाती है।

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छठी मइया को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है। इसलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी देवी की पूजा की जाती है ताकि वह बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु का आशीर्वाद दें। कहा जाता है कि जब प्रकृति देवी ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया, तो उनका छठा भाग “सर्वश्रेष्ठ मातृशक्ति” के रूप में जाना गया। यह देवी भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री मानी जाती हैं। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, यही देवी “छठी मइया” या “षष्ठी देवी” के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

छठी मइया की पूजा का महत्व

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठी मइया की पूजा की जाती है। यह पूजा बच्चे के जन्म के छह दिन बाद भी की जाती है। ऐसा माना जाता है कि उनकी उपासना से बच्चे को अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और लंबी उम्र मिलती है।

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छठी मइया को “कात्यायनी” के नाम से भी जाना जाता है, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। मां कात्यायनी भी बच्चों की रक्षा करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

छठी मइया मातृत्व शक्ति का प्रतीक हैं। सनातन परंपरा में षष्ठी देवी को बच्चों की रक्षक और आयु प्रदान करने वाली देवी माना गया है। महाभारत और पुराणों में भी षष्ठी देवी की महिमा का वर्णन मिलता है। छठी मइया की पूजा करने की परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि वे संतान की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं। इसलिए छठ महापर्व में छठी देवी की पूजा का विशेष महत्व है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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