
Who is IAS Jayanti Ravi: कभी-कभी एक ट्वीट भी बड़ा सियासी और प्रशासनिक सवाल खड़ा कर देता है। इस बार चर्चा में हैं एक फ्रांसीसी पत्रकार और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी। फ्रेंच पत्रकार और लेखक फ्रांस्वा गौतिये (François Gautier) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने आईएएस अधिकारी जयन्ती रवि पर गंभीर आरोप लगाए।
पत्र में उन्होंने कहा कि जयन्ती रवि ऑरोविल को नष्ट कर देंगी, जंगल काटने, चुने हुए समूहों को हटाने और 1965 की एक पुरानी शहर योजना लागू करने जैसे आरोप लगाए। उन्होंने यह भी लिखा कि अगर 1 मार्च को प्रधानमंत्री की मौजूदगी उनके साथ दिखाई गई, तो इससे ऑरोविल के विनाश पर मुहर लग जाएगी। इस पत्र के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर कौन हैं जयन्ती रवि, जिनका नाम लेकर सीधे प्रधानमंत्री से शिकायत की जा रही है?
डॉ. जयन्ती एस. रवि 1991 बैच की गुजरात कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वे ऑरोविल फाउंडेशन की सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति जुलाई 2021 में हुई थी और उनका कार्यकाल आगे भी बढ़ाया गया है। प्रशासनिक करियर में उन्होंने गुजरात सरकार और केंद्र सरकार, दोनों स्तरों पर अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे गुजरात में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव और आयुक्त रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी निदेशक स्तर पर काम किया है।
जयन्ती रवि सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित अधिकारी भी मानी जाती हैं। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से न्यूक्लियर फिजिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MPA) किया। साथ ही ई-गवर्नेंस में पीएचडी भी पूरी की। उनका नाम एक ऐसे अधिकारी के रूप में लिया जाता है, जो प्रशासन और अकादमिक क्षेत्र, दोनों में सक्रिय रही हैं। वे लेखन और शिक्षा से भी जुड़ी रही हैं और हार्वर्ड में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर भी योगदान दे चुकी हैं। जयन्ती रवि सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित अधिकारी भी मानी जाती हैं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और राष्ट्रीय रणनीति जैसे क्षेत्रों में काम किया है। गुजरात में कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य ढांचे को संभालने में उनकी अहम भूमिका रही। वे स्वच्छता और सतत विकास के मुद्दों पर भी सक्रिय रही हैं। उनकी पुस्तक “Sanity in Sanitation” भी चर्चा में रही है। ऑरोविल में भी वे सतत विकास और शहरी योजना से जुड़े कई पहलुओं पर काम कर रही हैं।
फ्रांस्वा गौतिये ने डॉ. जयन्ती पर आरोप लगाया कि वे 1965 की एक पुरानी शहर योजना लागू कर रही हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑरोविल के 90% निवासी उनके खिलाफ हैं। हालांकि इन आरोपों पर जयन्ती रवि या ऑरोविल फाउंडेशन की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऑरोविल, जो तमिलनाडु में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय टाउनशिप है, अपने अनोखे विकास मॉडल और पर्यावरणीय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। ऐसे में किसी भी बदलाव को लेकर बहस होना स्वाभाविक है।
जब प्रियंका गांधी के खेमे से जुड़ गई थीं जयन्ती
फ्रांस्वा गौतिये ने अपनी पोस्ट में एक और चौंकाने वाली बात लिखी। उन्होंने दावा किया कि जयंती रवि ने पहले भी पीएम को धोखा दिया था जब वे सोनिया गांधी के खेमे में चली गई थीं। अब वे दोबारा ऐसा कर रही हैं। यह राजनीतिक रूप से एक बड़ा आरोप है, खासकर तब जब जयन्ती रवि को गुजरात कैडर का होने के कारण पीएम मोदी और अमित शाह का भरोसेमंद माना जाता रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में ऑरोविल के विकास मॉडल, भूमि उपयोग और मास्टर प्लान को लेकर बहसें होती रही हैं। केंद्र सरकार ने ऑरोविल के बुनियादी ढांचे और मूल योजना को आगे बढ़ाने की बात कही है, जबकि कुछ निवासी पर्यावरण और स्थानीय निर्णय प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि विकास, पर्यावरण और स्थानीय भागीदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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