Arunachal Pradesh Case: कौन हैं प्रेमा थोंगदोक? अरुणाचल नागरिक को शंघाई एयरपोर्ट पर रोका, कहा, ‘चीनी पासपोर्ट बनवाओ’

Arunachal Pradesh Case: चीन और भारत के बीच सीमा को लेकर तनाव की लकीर एक बार फिर उभर आई। शंघाई एयरपोर्ट पर अरुणाचल की रहने वाली भारतीय नागरिक प्रेमा थोंगदोक को घंटों रोके रखा गया और कड़े सवाल पूछे गए। उन्हें ये तक कहा गया की अरुणाचल भारत का नहीं बल्कि चीन का हिस्सा है।

Priya Shandilya
अपडेटेड26 Nov 2025, 03:40 PM IST
कौन हैं प्रेमा थोंगदोक जिन्होंने शंघाई एयरपोर्ट पर अधिकारीयों द्वारा बदसलूकी का आरोप लगाया है?
कौन हैं प्रेमा थोंगदोक जिन्होंने शंघाई एयरपोर्ट पर अधिकारीयों द्वारा बदसलूकी का आरोप लगाया है?

Arunachal Pradesh case: आजकल विदेश यात्रा करते वक्त सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन की औपचारिकताएं आम बात हैं, लेकिन सोचिए अगर किसी को अचानक सिर्फ उसके राज्य के नाम पर रोक लिया जाए तो कैसा लगेगा? ऐसा ही कुछ हुआ प्रेमा वांगजॉम थोंगदोक के साथ, जो अरुणाचल प्रदेश से हैं और पिछले 14 साल से यूके में रहती हैं।

क्या है मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रेमा लंदन से जापान जा रही थीं और उनकी फ्लाइट का लेओवर शंघाई में था। यहीं से उनकी परेशानी शुरू हुई। ANI संग बातचीत में उन्होंने बताया कि एक महिला इमिग्रेशन अधिकारी ने उन्हें एयरपोर्ट में लगे लाइन से अलग कर दिया और कहा कि उनका पासपोर्ट वैध नहीं है। वजह पूछने पर अधिकारी ने कहा, "अरुणाचल? भारत में नहीं है, चीन में है, आपका पासपोर्ट वैध नहीं है।" इसके बाद कई चीनी अधिकारी और एयरलाइन स्टाफ अरुणाचल का नाम लेकर प्रेमा पर हंसते रहे और मजाक उड़ाते रहे। उन्होंने प्रेमा को चीनी पासपोर्ट बनवाने तक को कह दिया।

18 घंटे तक रोका

प्रेमा के मुताबिक, उन्हें करीब 18 घंटे तक वहीं रोककर रखा गया। परिवार से बात करने का मौका भी देर से मिला। वह पहले भी शंघाई ट्रांजिट कर चुकी थीं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।

भारतीय दूतावास ने की मदद

प्रेमा ने फिर शंघाई और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में संपर्क किया। भारतीय अधिकारियों ने एक घंटे के अंदर एयरपोर्ट पहुंचकर न सिर्फ उनकी मदद की, बल्कि एयरपोर्ट अधिकारियों से बात करके उन्हें वहां से सुरक्षित निकलवाया। उन्होंने बताया कि भारतीय अधिकारियों ने उन्हें खाना भी उपलब्ध कराया।

कौन हैं प्रेमा वांगजॉम थोंगदोक?

प्रेमा मूल रूप से अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले के रूपा की रहने वाली भारतीय नागरिक हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स (ऑनर्स) करने के बाद उन्होंने यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ हर्टफोर्डशायर से इंटरनेशनल बिजनेस में MSc की पढ़ाई की है। लंबे समय से वे यूके में काम और जीवन दोनों संभाल रही हैं।

भारत की सख्त प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद भारत सरकार ने चीन को साफ कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस राज्य के नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। चीन लंबे समय से अरुणाचल को 'दक्षिण तिब्बत' बताने की कोशिश करता रहा है, जिसे भारत हर बार सख्ती से नकारता आया है। विदेश मंत्रालय ने चीनी अधिकारियों की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह इंटरनेशनल एयर ट्रैवल नियमों और चीन के अपने वीजा‑फ्री ट्रांजिट नियमों का उल्लंघन है।

चीन ने आरोपों को नकारा

मंगलवार को चीन ने थोंगदोक द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जांच पूरी तरह कानून के मुताबिक हुई और किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई। उन्होंने यह भी बताया कि एयरलाइन ने आराम और खाने की सुविधा दी थी। चीन ने कहा कि बॉर्डर पर लोगों की जांच करना हर देश की सामान्य प्रक्रिया है। यही वजह है कि थोंगदोक के मामले में भी नियमों के हिसाब से कार्रवाई की गई।

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