आदित्य धर की फिल्म धुरंधर के रिलीज होते ही इंटरनेट पर अक्षय खन्ना के रहमान डकैत वाले किरदार की धूम मच गई है। कराची के लियारी इलाके के इस गैंगस्टर के रूप में उनका खौफनाक अभिनय इतना असरदार रहा कि लोग उनके अभिनय को देखकर दीवाने हो गए और यह जानने की कोशिश में लगे हुए हैं कि असली रहमान डकैत कौन था। तीन दशक से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहे खन्ना को इस किरदार के लिए जबरदस्त सराहना मिल रही है।
अक्षय खन्ना का किरदार इंटरनेट पर छाया
फिल्म की जासूसी कहानी में खलनायक के रूप में अक्षय खन्ना ने जो प्रभाव छोड़ा, वह अद्भुत था। उनकी संवाद शैली, उनकी आंखों की खामोश अभिव्यक्ति, और हर दृश्य में उनका व्यक्तित्व पूरी तरह हावी रहा।
फिल्म में रणवीर सिंह जैसे मशहूर कलाकारों के होते हुए भी अक्षय खन्ना ने अपनी दमदार मौजूदगी से पर्दे पर सबका ध्यान खींच लिया। सोशल मीडिया पर लोग अक्षय खन्ना और उनके अभिनय के इतने दीवाने हो गए हैं कि कई लोग असली रहमान डकैत के पुराने वीडियो बताकर शेयर कर रहे हैं और उनके साथ फिल्म के क्लिप जोड़ रहे हैं। ज्यों-ज्यों यह किरदार चर्चा में आया, दर्शकों ने रहमान के जीवन, उसके अपराधों और उसकी असलियत के बारे में खोजना शुरू कर दिया।
पाकिस्तानी गैंगस्टर रहमान डकैत कौन था?
साल 1975 में सरदार अब्दुल रहमान बलोच के रूप में जन्मा रहमान डकैत, मशहूर गैंगस्टर मोहम्मद डडल का बेटा था। उसका जन्म और पालन-पोषण कराची बंदरगाह के पास बसे लियारी इलाके में हुआ, जहां लगभग 60 सालों से खतरनाक गैंगों का राज था।
यह इलाका नशीली दवाओं की तस्करी, लूटपाट और निशाने साधकर की जाने वाली हत्याओं के लिए बदनाम था। इसकी अपराध कहानियां कई बार बड़े विदेशी अखबारों में भी छपती रही थीं।
कहा जाता है कि रहमान सबसे डरावने अपराधियों में से एक था और उसने मात्र 13 वर्ष की उम्र में पहली हत्या की थी। फिल्म में दिखाया गया है कि उसने अपनी मां की हत्या की थी। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सच भी बताया जाता है कि उसने अपनी मां की हत्या इसलिए की क्योंकि उसके दूसरी गैंग के मुखिया से संबंध थे, जिसने उसके पिता की हत्या की थी। यह अपराध उसने 15 साल की उम्र में किया।
पिता की मौत के बाद रहमान गैंग का सरगना बन गया और लगातार हत्कयाएंरता रहा, डर फैलाता रहा और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को चलाता रहा। उसने अरशद पप्पू जैसे कुख्यात अपराधियों से दुश्मनी भी निभाई।
एक समय में उसका गैंग लियारी के लगभग पचासी प्रतिशत हिस्से पर हावी था। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वह हाजी लालू के गैंग में शामिल हुआ और 2001 में लालू की गिरफ्तारी के बाद उसने नेतृत्व संभाल लिया।
उसकी क्रूर छवि के बावजूद वह कई लोगों के बीच एक तरह से रॉबिनहुड माना जाता था, क्योंकि वह गरीब समुदायों की मदद करता था और बलोच लोगों का नेता भी समझा जाता था। माना जाता है कि उसकी कई राजनेताओं और राजनीतिक दलों से गहरी जान-पहचान थी, जो लियारी क्षेत्र में वोट जुटाने के लिए उसका उपयोग करते थे।
उसे कई बार गिरफ्तार किया गया, लेकिन अपने प्रभाव और संबंधों के कारण वह हर बार बच निकलता था। 2006 में उसकी एक मशहूर गिरफ्तारी भी हुई थी। आखिरकार साल 2009 में एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान वह मारा गया।