National Milk Day: 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाने के पीछे क्या है कहानी? जानें महत्व

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस हर साल 26 नवंबर को डॉ. वर्गीज कुरियन की याद में मनाया जाता है। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड और श्वेत क्रांति के जरिए भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाया। यह दिन उनके योगदान और दूध के महत्व को याद करने का अवसर है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड26 Nov 2025, 10:49 AM IST
26 नवंबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का महत्व
26 नवंबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का महत्व

National Milk Day: भारत में 26 नवंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण तारीख है। यह वही दिन है जिसने देश की डेयरी कहानी को नई दिशा दी। आज के ही दिन भारत हर साल राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाता है और इसके पीछे खड़े हैं भारत के मशहूर 'मिल्कमैन ऑफ इंडिया', डॉ. वर्गीज कुरियन, जिनका योगदान देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की कमाई को नई ऊंचाइयों तक ले गया।

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस क्यों मनाया जाता है?

सरकार के पशुपालन मंत्रालय के मुताबिक, इस दिन का मकसद सिर्फ दूध के फायदे बताना नहीं है, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि दूध और दुग्ध उत्पाद हमारे जीवन में कितने जरूरी हैं। इसी दिन, साल 1921 में, डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म हुआ था। वो शख्स जिन्होंने भारत में डेयरी क्षेत्र में क्रांति ला दी। 2014 में भारतीय डेयरी एसोसिएशन और 22 राज्यों के दूध संघों ने मिलकर तय किया कि कुरियन जी के जन्मदिन पर ही राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाएगा। तभी से हर साल 26 नवंबर को यह दिवस मनाया जाता है।

ऑपरेशन फ्लड: भारत की डेयरी रिवोल्यूशन

डॉ. कुरियन का सबसे बड़ा योगदान है ‘ऑपरेशन फ्लड’, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम माना जाता है। 13 जनवरी 1970 को लॉन्च हुआ यह कार्यक्रम आने वाले 30 साल में भारत को दूध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि दुनिया का नंबर वन निर्माता बना गया। ऑपरेशन फ्लड ने किसानों को पहली बार अपने संसाधनों पर सीधा नियंत्रण दिया, जिससे वे अपनी कमाई और विकास खुद तय कर सके। यही क्रांति आगे चलकर ‘श्वेत क्रांति’ कहलाई।

अमूल से आत्मनिर्भरता तक

डॉ. कुरियन ने 30 से ज्यादा किसान-चालित संस्थाओं का निर्माण किया। सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी 'अमूल' को खड़ा करना और उसे हर घर का भरोसेमंद ब्रांड बनाना। 1998 में भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना। यह कुरियन के प्रयासों का बड़ा नतीजा था। उन्होंने दिल्ली दूध योजना को भी मजबूत किया, कीमतों में सुधार किया और देश को खाद्य तेलों में भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।

कई पुरस्कारों से सम्मानित

कुरियन को रेमन मैग्सेसे (1963), कृषि रत्न (1986), विश्व खाद्य पुरस्कार (1989) जैसे पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। भारत ने भी उन्हें पद्मश्री (1965), पद्मभूषण (1966) और पद्मविभूषण (1999) से सम्मानित किया गया है।

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