
भारतीय फैशन शो में आजकल बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी बढ़ रही है। पहले यह मंच सिर्फ प्रोफेशनल मॉडल्स के लिए था, लेकिन अब जाह्नवी कपूर, रणवीर सिंह, अनन्या पांडे जैसे बॉलिवुडिया सितारे रैंप पर शोस्टॉपर बनकर छा रहे हैं। इससे फैशन इंडस्ट्री को फायदा तो हो रहा है, लेकिन प्रोफेशनल मॉडल्स और रैंप की कला को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं।
फैशन डिजाइनर्स सिलेब्रिटीज को रैंप पर लाने को बेताब रहते हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण ये हैं...
मीडिया और सोशल मीडिया का ध्यान: सितारों की मौजूदगी से इंस्टाग्राम जैसे शॉर्ट वीडियोज प्लैटफॉर्म्स पर ब्रांड की पहुंच बढ़ती है। जाह्नवी कपूर जैसे सितारों के रैंप वॉक की चर्चा खबरों और सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाती है।
युवा दर्शकों को आकर्षित करना: बॉलीवुड और फैशन का मेल जेन जी को बहुत पसंद है। सितारों के फैन्स उनके कपड़ों और ब्रांड को फॉलो करते हैं, जिससे डिजाइनर को फायदा होता है।
ब्रांड की पहचान: सिलेब्रिटीज का चेहरा ब्रांड को तुरंत पहचान दिलाता है। बॉलिवुड सिलेब्रिटी सारा जेन डायस कहती हैं कहा, ‘सिलेब्रिटीज को शोस्टॉपर बनाने का मकसद ब्रांड को पब्लिसिटी और विश्वसनीयता देना है।’
सिलेब्रिटीज की बढ़ती मौजूदगी से कुछ लोग खुश नहीं हैं। लेकिन क्यों? वो कहते हैं कि रैंप शो पहले मॉडल्स की प्रतिभा दिखाने का मंच था, लेकिन अब सितारों को प्राथमिकता मिलने से मॉडल्स के लिए मौके कम हो रहे हैं। उनका कहना है कि प्रोफेशनल मॉडल्स को कपड़ों को सही तरीके से पेश करने की ट्रेनिंग मिलती है।
लेकिन सिलेब्रिटीज का रैंप वॉक कभी-कभी कपड़ों से ज्यादा उनके स्टारडम पर फोकस करता है। जैसे, जाह्नवी कपूर के 'उछलते हुए' वॉक की आलोचना हुई क्योंकि उससे कपड़ों का प्रभाव कम हो गया। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट में पूर्व मॉडल और एक्टर राहुल देव और सारा जेन डायस के बयान शामिल है। राहुल देव ने कहा, 'मॉडलिंग में कपड़े हीरो होते हैं, जबकि फिल्मों में किरदार। ये दोनों अलग-अलग स्किल हैं। मॉडल्स की ट्रेनिंग और फिजिकल प्रजेंस कपड़ों को बेहतर दिखाने के लिए जरूरी है।'
राहुल देव और सारा जेन डायस जैसे लोग मानते हैं कि सिलेब्रिटीज मॉडल्स की जगह पूरी तरह नहीं ले सकते। राहुल ने कहा, 'सिलेब्रिटीज महंगे होते हैं और हर शो में उन्हें बुलाना मुश्किल है। मॉडल्स की ट्रेनिंग और स्टैंडर्ड माप के कारण डिजाइनर्स हमेशा उनकी ओर लौटेंगे।' वहीं, सारा की राय है, 'सिलेब्रिटीज और मॉडल्स की भूमिका अलग है। सिलेब्रिटीज पब्लिसिटी के लिए हैं, मॉडल्स कपड़ों को पेश करने के लिए। दोनों का अपना स्थान है।' सारा ने डायना, सान्या और दीप्ति जैसे भारतीय सुपरमॉडल्स की तारीफ की, जिन्होंने लंबे समय तक इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाए रखी है।
उचित तो यही होगा कि फैशन इंडस्ट्री को सितारों की चमक और मॉडल्स की कला दोनों का फायदा उठाने के लिए संतुलन बनाए। कुछ डिजाइनर्स अब सितारों को शो के बीच में शामिल करते हैं, ताकि कपड़ों का फोकस बना रहे और पब्लिसिटी भी मिले। साब्यासाची जैसे ब्रांड सोशल मीडिया पर सितारों के साथ-साथ अपने डिजाइनों की कारीगरी भी दिखाते हैं।
इससे ग्लैमर और कला दोनों की बात होती है। डिजाइनर्स को यह साफ करना चाहिए कि उनका शो पब्लिसिटी के लिए है या फैशन की कला दिखाने के लिए। इससे दर्शकों को सही उम्मीदें होंगी। सारा ने बताया कि आज रैंप पर अलग-अलग आकार, लिंग और शहरों से मॉडल्स मंच पर दिख रहे हैं। भविष्य में अर्जुन रामपाल और मिलिंद सोमन जैसे पुरुष मॉडल्सका दौर लौटाने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, बॉलीवुड सितारों का रैंप पर आना फैशन इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे ब्रांड को ज्यादा लोग देखते हैं। लेकिन प्रोफेशनल मॉडल्स की कला और मेहनत को भी उतना ही महत्व देना जरूरी है। अगर डिजाइनर्स सितारों और मॉडल्स के बीच सही तालमेल बिठाएं, तो भारतीय फैशन इंडस्ट्री और मजबूत होगी। दोनों को साथ लेकर चलने से न सिर्फ ग्लैमर बढ़ेगा, बल्कि फैशन की असली खूबसूरती भी बनी रहेगी।
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