Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के मौके पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग? जानिए पतंगबाजी से जुड़े ये कारण

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। इस दिन पतंग उड़ाना सूर्य उपासना, उत्तरायण और सर्दियों के अंत का प्रतीक माना जाता है। धूप, शारीरिक गतिविधि और परंपरा के कारण पतंगबाजी लोकप्रिय हुई और आज यह उत्सव की पहचान बन चुकी है।

Manali Rastogi
अपडेटेड12 Jan 2026, 03:38 PM IST
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के मौके पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग? जानिए पतंगबाजी से जुड़े ये कारण
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के मौके पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग? जानिए पतंगबाजी से जुड़े ये कारण

मकर संक्रांति भारत भर में मनाया जाने वाला एक रंग-बिरंगा और खुशियों से भरा त्योहार है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। मकर संक्रांति सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़ा एक सांस्कृतिक उत्सव है। इस दिन आसमान में उड़ती रंगीन पतंगें इस त्योहार की सबसे खास पहचान बन चुकी हैं। आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई।

सूर्य उपासना से जुड़ा पर्व

मकर संक्रांति सूर्य देव की पूजा का पर्व माना जाता है। सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। पतंग उड़ाना सूर्य देव के प्रति आभार और भक्ति प्रकट करने का एक तरीका है। यह सूर्य के ऊपर उठने और शीत ऋतु के अंत का भी प्रतीक है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, पतंग उड़ाने से दिवंगत आत्माओं को स्वर्ग तक पहुंचने में मदद मिलती है, क्योंकि पतंग को धरती और आकाश के बीच संदेशवाहक माना जाता है।

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जानिए खगोलीय महत्व

मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा शुरू होती है, जिससे सर्दी कम होने लगती है और दिन लंबे होने लगते हैं। ‘मकर’ का अर्थ मकर राशि और ‘संक्रांति’ का मतलब सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना है। यह बदलाव अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जितनी ऊंची पतंग उड़ती है, उतना ही इंसान ईश्वर के करीब पहुंचता है।

क्या है वैज्ञानिक कारण?

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, पतंग उड़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। यह त्योहार सर्दियों में आता है, जब लोग बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। पतंग उड़ाते समय शरीर धूप के संपर्क में आता है, जिससे विटामिन-डी मिलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही, पतंग उड़ाना एक शारीरिक गतिविधि है, जो रक्त संचार बेहतर करती है और शरीर को गर्म रखती है।

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जानें ऐतिहासिक जड़ें

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। माना जाता है कि मुगल काल में भी पतंग उड़ाना एक लोकप्रिय शौक था, जो धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया। मौसम के बदलाव और बसंत के आगमन की खुशी को दर्शाने के लिए पतंग उड़ाई जाने लगी।

होती हैं पतंगबाजी प्रतियोगिताएं

भारत के कई हिस्सों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। लोग एक-दूसरे की पतंग काटने की कोशिश करते हैं। यह प्रतिस्पर्धा रोमांचक होने के साथ-साथ लोगों को जोड़ने का काम भी करती है। इस दौरान लोग अपने अनुभव और तरीके भी साझा करते हैं।

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जानिए क्षेत्रीय विविधताएं के बारे में

हालांकि पतंग उड़ाने की परंपरा पूरे भारत में प्रचलित है, लेकिन हर राज्य में इसका अंदाज अलग है। गुजरात में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित होता है, जहां दुनिया भर से लोग हिस्सा लेते हैं। पंजाब में यह पर्व लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है और वहां भी पतंग उड़ाने का खास महत्व है। यही विविधता मकर संक्रांति को और भी खास बनाती है।

(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)

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