Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजा पर पीला रंग पहनना क्यों माना जाता है शुभ? जानिए क्या है महत्व

बसंत पंचमी देवी सरस्वती की पूजा का शुभ पर्व है, जो ज्ञान, विद्या और कला की देवी हैं। यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन पीला रंग शुभ माना जाता है, जो ऊर्जा, नई शुरुआत, आनंद और ज्ञान के प्रकाश को दर्शाता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड21 Jan 2026, 11:35 AM IST
Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजा पर पीला रंग पहनना क्यों माना जाता है शुभ? जानिए क्या है महत्व
Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजा पर पीला रंग पहनना क्यों माना जाता है शुभ? जानिए क्या है महत्व

बसंत पंचमी देवी सरस्वती की आराधना का एक अत्यंत शुभ पर्व है। इस पावन दिन सरस्वती पूजा की जाती है और भक्त मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद मांगते हैं। इस वर्ष बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को, यानी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

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क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन लोग पीले कपड़े क्यों पहनते हैं? या फिर हम सिर्फ परंपरा निभा रहे हैं, बिना इसके पीछे का कारण जाने? अगर आप इसका महत्व नहीं जानते, तो आइए इसके बारे में सरल शब्दों में समझते हैं।

बसंत पंचमी का महत्व

इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और उन्हें पीले रंग का भोग अर्पित किया जाता है। मां सरस्वती विद्या, ज्ञान, कला, रचनात्मकता और संगीत की देवी हैं। मान्यता है कि वे भगवान ब्रह्मा की सहचरी हैं और सृष्टि की रचना में उनकी सहायता करती हैं।

कौन हैं मां सरस्वती?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, मां सरस्वती वाणी, शिक्षा और रचनात्मकता की अधिष्ठात्री देवी हैं। उन्हें चार भुजाओं में वेद, वीणा, श्वेत कमल और जप माला धारण किए हुए दिखाया जाता है। वे सृष्टि की मूल ऊर्जा का प्रतीक हैं।

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सरस्वती पूजा में पीले कपड़े क्यों पहने जाते हैं?

पीला रंग बसंत ऋतु का प्रतीक है। यह रंग फसलों के पकने, सरसों के खेतों और चारों ओर खिले पीले फूलों को दर्शाता है। पीला रंग प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत देता है। चूंकि बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है, इसलिए इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीला भोग चढ़ाते हैं, पीले फूल अर्पित करते हैं और मां सरस्वती को हल्दी का तिलक लगाते हैं। कई लोग देवी को पीली साड़ी भी चढ़ाते हैं और स्वयं नए पीले कपड़े पहनते हैं।

पीला रंग और गुरु बृहस्पति

पीले रंग का संबंध बुद्धि, ज्ञान और सौभाग्य से है। हिंदू धर्म में गुरु बृहस्पति (जुपिटर), भगवान दत्तात्रेय और भगवान दक्षिणामूर्ति को भी पीले वस्त्रों में दर्शाया गया है। ये सभी देवता ज्ञान और शिक्षा से जुड़े हैं। इसलिए पीला रंग मां सरस्वती के ज्ञान स्वरूप को दर्शाता है।

पीला रंग: खुशी और आनंद का प्रतीक

पीला रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि खुशी और सकारात्मकता की भावना है। मां सरस्वती को चढ़ाए जाने वाले गेंदे के फूल, भक्तों के पीले वस्त्र, सरसों के खेत और हल्दी से बनी मिठाइयां सब मिलकर इस पर्व को खास बनाते हैं।

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यह रंग नए आरंभ, बसंत की गर्माहट और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह ऋतु और आत्मिक पुनर्जन्म से जुड़ा है।

इस बसंत पंचमी पर इस पर्व का पूरे मन से आनंद लें। चमकीले पीले कपड़े पहनें, मां सरस्वती को सुगंधित पीले फूल और पीले पकवान अर्पित करें। मां सरस्वती से आशीर्वाद लें ताकि आपका जीवन सकारात्मकता, समृद्धि और ज्ञान से भर जाए।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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