Why Financial Year Starts From 1st April: आज 1 अप्रैल है। दुनिया के लिए यह अप्रैल फूल बनाने का दिन होगा, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था, टैक्सपेयर्स और सरकारी सिस्टम के लिए यह साल का सबसे अहम दिन है। आज से नए वित्तीय वर्ष (Financial Year 2026-27) की शुरुआत हो रही है। आमतौर पर हम नया साल 1 जनवरी को मनाते हैं, लेकिन बैंकों से लेकर सरकार के बजट तक के लिए यह 1 अप्रैल को मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरी दुनिया में कैलेंडर 1 जनवरी से बदलता है, तो भारत में यह वित्तीय वर्ष तीन महीने बाद क्यों आता है? इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानसून और औपनिवेशिक इतिहास की एक लंबी कहानी है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
अंग्रेज चले गए लेकिन दे गए वित्तीय हिसाब का अपना फॉर्मूला
भारत में 1 अप्रैल से वित्तीय वर्ष की शुरुआत होने का सबसे बड़ा ऐतिहासिक कारण ब्रिटिश शासन है। आजादी से पहले जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था, तब ब्रिटिश प्रशासन ने अपनी सुविधा के अनुसार यहां के अकाउंटिंग सिस्टम को तैयार किया था। साल 1867 से पहले भारत में भी वित्तीय वर्ष मई से शुरू होकर अगले साल अप्रैल तक चलता था, लेकिन अंग्रेजों ने इसे बदलकर अप्रैल से मार्च कर दिया, ताकि इसे ब्रिटेन के फाइनेंशियल कैलेंडर के साथ जोड़ा जा सके। ब्रिटिश परंपरा में टैक्स और खातों का मिलान अप्रैल से करने का रिवाज पुराना था, जिसे उन्होंने भारत में भी सख्ती से लागू कर दिया। धीरे-धीरे यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बन गया और आजादी के बाद भी इसे बदलना लगभग असंभव और गैर-जरूरी माना गया।
किसानों से भी जुड़ा है वित्तीय वर्ष का निर्धारण
भारत शुरू से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है। आज भी एक बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। 1 अप्रैल से नया साल शुरू करने का एक व्यावहारिक कारण फसल चक्र भी है। भारत में मानसून जून से सितंबर के बीच आता है, जिसके आधार पर खरीफ और रबी की फसलें तय होती हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच किसान अपनी फसलों की कटाई करते हैं और उन्हें बाजार में बेचते हैं। मार्च के आखिर तक सरकार और किसानों दोनों को इस बात का स्पष्ट अंदाजा हो जाता है कि इस साल पैदावार कैसी रही और राजस्व कितना आएगा। अगर वित्तीय वर्ष जनवरी से शुरू होता, तो फसल कटाई के बीच में ही हिसाब-किताब करना मुश्किल हो जाता।
1 अप्रैल से पहले पूरी हो जाती हैं बजट की सारी प्रक्रियाएं
बता दें कि भारत सरकार हर साल अपना बजट फरवरी के महीने में पेश करती है। पहले यह फरवरी के आखिरी वर्किंग डे पर आता था, लेकिन 2017 से इसे 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा है। इसके पीछे का मकसद यही है कि 1 अप्रैल को नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होने से पहले संसद में बजट की सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं। इससे सरकारी विभागों को नए प्रोजेक्ट्स और जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसा आवंटित करने में देरी नहीं होती है। 1 अप्रैल की समयसीमा सरकार को यह मौका देती है कि वह पिछले साल के खर्चों की समीक्षा करे और आने वाले साल के लिए विकास का खाका तैयार करे।