
UGC Guidelines News: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पर रोक लगा दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉमाल्या बागची की पीठ ने रेग्युलेशन की भाषा पर बेहद कड़ी टिप्पणी की है।
उधर, यूजीसी की गाइडलाइंस के खिलाफ विभिन्न मोर्चों पर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। इस मामले पर जमकर राजनीति भी हो रही है। आइए जानते हैं कि आखिर 13 जनवरी, 2026 को अधिसूचित यूजीसी गाइडलाइंस में ऐसा क्या है जिसने एक वर्ग में उबाल ला दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने 13 जनवरी को नए विनियम अधिसूचित किए जिनके तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समता को बढ़ावा देने के वास्ते 'समता समितियों' का गठन अनिवार्य किया गया है।
हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘मैं विनम्रतापूर्वक सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी को भी किसी प्रकार के उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर इस नियम का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा।’
यूजीसी ने 2026 के ये नियम रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला और पायल तड़वी की मां आबेदा सलीम तड़वी की 2019 में दायर एक जनहित याचिका के बाद बनाए थे। इस याचिका में उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने की मांग की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, रोहित वेमुला और पायल तड़वी दोनों ने अपने विश्वविद्यालयों में कथित जाति-आधारित भेदभाव का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि यूजीसी ने जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया है। उस समय न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि उसका इरादा परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक 'बहुत मजबूत और पुख्ता तंत्र' सुनिश्चित करना है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.