
जैसे ही सर्दी शुरू होती है, भारतीय रसोई अपने-आप ऐसे खाने की ओर मुड़ जाती है जो शरीर को अंदर से गर्म रखें। इन्हीं में सबसे ऊपर आते हैं गोंद के लड्डू। दादी-नानी के नुस्खों, डिलीवरी के बाद की देखभाल और बचपन की सर्दियों से जुड़े ये लड्डू आम मिठाइयों जैसे नहीं होते। ये एक तरह का फ़ंक्शनल फूड हैं, जो शरीर को पोषण देने, ताकत बढ़ाने और ठंड में सुरक्षा देने के लिए बनाए जाते हैं।
खाने वाला गोंद, घी, मेवे और गेहूं के आटे से बने गोंद के लड्डू धीरे-धीरे ऊर्जा देते हैं, जोड़ों को सहारा देते हैं और शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं। नीचे इसकी आसान और भरोसेमंद रेसिपी दी गई है, साथ ही इसके असली स्वास्थ्य लाभ भी बताए गए हैं, जो बताते हैं कि यह पुरानी मिठाई आज भी क्यों ज़रूरी है।
गोंद या खाने वाला गोंद बबूल के पेड़ से मिलता है। जब इसे घी में तला जाता है, तो यह फूलकर हल्का हो जाता है, जिससे यह पचाने में आसान बनता है। भारतीय घरों में गोंद को पारंपरिक रूप से ताकत बढ़ाने और सहनशक्ति सुधारने वाला माना जाता है, खासकर सर्दियों में जब शरीर में जकड़न और कमजोरी महसूस होती है। इसकी गर्म तासीर की वजह से इसे घी, सोंठ और मेवों के साथ मिलाया जाता है। ये सभी चीज़ें मिलकर शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती हैं।
सामग्री
ताकत और सहनशक्ति बढ़ाते हैं: गोंद के लड्डू बीमारी या कमजोरी से उबरने के समय दिए जाते हैं, क्योंकि गोंद, मेवे और घी मिलकर लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं।
सर्दियों में शरीर को गर्म रखते हैं: गोंद, घी और सोंठ जैसे तत्वों की गर्म तासीर शरीर को अंदर से गर्म रखती है, खासकर ठंडी सुबह और शाम में।
जोड़ों और हड्डियों के लिए फायदेमंद: गोंद को जोड़ों की चिकनाई बढ़ाने में मददगार माना जाता है। मेवों में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और अच्छे फैट हड्डियों को मज़बूत रखते हैं।
धीरे-धीरे ऊर्जा देने वाला स्नैक: दूसरी मिठाइयों की तुलना में गोंद के लड्डू तुरंत नहीं, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं, जिससे सर्दियों की थकान कम होती है।
भारी होने के बावजूद पाचन में मददगार: सोंठ और इलायची घी और मेवों की भारी तासीर को संतुलित करती हैं, जिससे सीमित मात्रा में खाने पर अपच नहीं होती।
अधिकांश वयस्कों के लिए रोज एक लड्डू काफी होता है। ये पोषण से भरपूर होते हैं, हल्के स्नैक नहीं। इन्हें मिठाई नहीं, बल्कि औषधि जैसा समझकर खाएं। कभी-कभी सबसे अच्छा हेल्थ फॉर्मूला वही होता है, जो पहले से आपकी दादी की रेसिपी की कॉपी में लिखा होता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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