Govardhan Puja 2025: घर पर कैसे करें गोवर्धन पूजा? जानिए दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का महत्व, पढ़िए कथा

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा का महत्व बताया। यह दिन सामूहिकता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु अन्नकूट बनाकर आभार व्यक्त करते हैं।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड21 Oct 2025, 04:27 PM IST
Govardhan Puja 2025: घर पर कैसे करें गोवर्धन पूजा? जानिए दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का महत्व, पढ़िए कथा
Govardhan Puja 2025: घर पर कैसे करें गोवर्धन पूजा? जानिए दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का महत्व, पढ़िए कथा

दिवाली की चमक के बाद आता है एक ऐसा दिन जो कृतज्ञता और आस्था का प्रतीक है। इस दिन को गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है, जिसे अन्नकूट भी कहते हैं। यह दिन भक्ति और विनम्रता की अहंकार पर विजय का प्रतीक है और हमें प्रकृति, जीवन-निर्वाह और ईश्वरीय संरक्षण के रिश्ते की याद दिलाता है।

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दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला यह पर्व पौराणिकता और पर्यावरणीय जागरूकता दोनों से जुड़ा है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण को धन्यवाद देने का है, जिन्होंने मानवता को आत्मनिर्भरता और सामूहिकता का पाठ सिखाया था।

कब है गोवर्धन पूजा? जानिए तिथि और समय

गोवर्धन पूजा इस बार बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को पड़ता है।

तिथि विवरण:

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 21 अक्टूबर 2025, शाम 5:54 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त – 22 अक्टूबर 2025, रात 8:16 बजे
  • यह तिथि दिवाली अमावस्या के अगले दिन आती है, जो 21 अक्टूबर की रात को समाप्त होती है।

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गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा का मुहूर्त प्रातःकाल (सुबह के समय) का होता है, सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले।

पूजा मुहूर्त:

  • प्रातःकाल मुहूर्त – सुबह 6:26 बजे से 8:42 बजे तक (22 अक्टूबर 2025)
  • अवधि – 2 घंटे 16 मिनट
  • अमावस्या तिथि में पूजा नहीं करनी चाहिए, इसलिए पूजा प्रतिपदा तिथि शुरू होने के बाद ही करनी चाहिए।

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है? यहां पढ़िए कथा

गोवर्धन पूजा की कथा भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी है। मान्यता है कि जब गोकुल के लोग भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए भव्य यज्ञ करने लगे, तब बालक कृष्ण ने उन्हें ऐसा करने से रोका। उन्होंने कहा कि वर्षा और अन्न का असली स्रोत गोवर्धन पर्वत है, इसलिए उसकी पूजा करनी चाहिए।

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इंद्र इससे क्रोधित हो गए और भारी वर्षा करने लगे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों और गायों की रक्षा की। सात दिन बाद इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार की और वर्षा बंद की। इसके बाद गांव के लोगों ने भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के प्रति आभार जताने के लिए अन्नकूट (भोजन पर्वत) बनाया। यही परंपरा आज भी निभाई जाती है।

घर पर गोवर्धन पूजा कैसे करें?

  • घर की सफाई और सजावट करें: रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
  • गोवर्धन पर्वत का प्रतीक तैयार करें: गाय के गोबर या मिट्टी से एक छोटा पहाड़ बनाएं।
  • अन्नकूट का भोग लगाएं: तरह-तरह के शाकाहारी व्यंजन, मिठाइयां और फल बनाकर भगवान को अर्पित करें।
  • पूजा करें: दीप जलाएं, फूल और धूप अर्पित करें, और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करें।
  • भजन-कीर्तन करें: श्रीकृष्ण के नाम का जाप करें जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “गोवर्धन गिरिधारी कृष्ण नमः।”
  • गौ-सेवा और दान करें: गायों को भोजन कराएं और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करें।

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दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा दिवाली के बाद आती है और यह भौतिक समृद्धि से आध्यात्मिक कृतज्ञता की ओर बढ़ने का प्रतीक है। जहां दिवाली प्रकाश और धन की देवी लक्ष्मी की आराधना का पर्व है, वहीं गोवर्धन पूजा हमें विनम्रता और प्रकृति के प्रति आभार का संदेश देती है।

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मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में इस दिन अन्नकूट महोत्सव बहुत भव्य रूप से मनाया जाता है, जहाँ सैकड़ों व्यंजन भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं। यह त्योहार केवल पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, मानव और ईश्वर के बीच संतुलन और आभार का प्रतीक है। गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में विनम्रता, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान सबसे बड़ा धर्म है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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