ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना का पराक्रम दुनिया ने देखा। एक-एक भारतीय अपने सैनिकों के शौर्य को सलाम करता है। लेकिन क्या सरकारी तंत्र की नजर में भी हमारे वीर सैनिकों का कोई सम्मान है? यह सवाल इसलिए क्योंकि ट्रेन में सफर कर रहे कुछ जवानों की दुर्दशा का खून खौलाने वाला वीडियो सामने आया है। रिटायर्ड फौजियों और एक पूर्व आर्मी चीफ ने यह वीडियो देखकर रेलवे सिस्टम पर कड़ी आपत्ति जताई है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) कंवलजीत सिंह ढिल्लन ने यहां तक कह डाला कि दरअसल सोशल मीडिया पर जवानों की वाहवाही एक ढोंग मात्र है।
वीडियो देख आप भी हो जाएंगे दुखी
ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) हरदीप सिंह सोही ने अपने एक्स हैंडल से 37 सेकंड का वीडियो पोस्ट किया है। उस वीडियो में कई फौजी जवान ट्रेन के गेट के पास और गलियारे में जमीन पर सोए हुए दिख रहे हैं। ब्रिगेडियर सोही ने इस वीडियो पोस्ट करते हुए पूछा कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने लिखा, 'मिलिट्री कोच में सैनिक बिना रिजर्वेशन के यात्रा किया करते थे। अब उन्हें हटा दिया गया है। इसका जिम्मेदार कौन है? गैलेंट्री पास वाले भी दूसरों की तरह ऑनलाइन सीट बुक क्यों नहीं कर सकते हैं?' ब्रिगेडियर सोही का आखिरी सवाल सेना से प्यार करने वाले हर भारतीय का दिल झकझोर देगा। उन्होंने पूछा, 'इन घायल सैनिकों को आखिर लंबी लाइनों में खड़ा क्यों होना पड़ता है?' उन्होंने अपनी पोस्ट में रेल मंत्रालय को भी टैग किया है।
क्या हमारा सैनिकों के प्रति सम्मान सिर्फ दिखावा है?
ब्रिगेडियर सोही की पोस्ट देखकर लेफ्टिनेंट जनरल पोस्ट से रिटायर हुए केजेएस ढिल्लन काफी आक्रोशित हो गए। उन्होंने वीडियो रिपोस्ट करते हुए कहा कि जवानों के प्रति सम्मान के दावे खोखले हैं। उन्होंने लिखा, 'सोशल मीडिया पर तो देश का रक्षक बताओ और व्यवहार ऐसा करो जैसे वास्तव में वो कोई हैं ही नहीं। जवानों को लेकर ऐसा दोहरा रवैया क्यों?' वो कहते हैं, 'जिम्मेदारियों के कारण सैन्य अधिकारियों और जवानों को आखिरी क्षण में छुट्टी मिलती है। उनके पास पहले से सीट रिजर्व करने का मौका नहीं होता है। सभी ट्रेनों से मिलिट्री कोचों का क्या हो गया? उन्हें फिर से सभी ट्रेनों में क्यों नहीं लगाया जा सकता है?' लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने रेल मंत्रालय और आर्मी के एक एक्स हैंडल को टैग करते हुए पूछा कि क्या कोई चिंता को समझ भी रहा है?
पूर्व आर्मी चीफ ने भी जताई नाराजगी
इस वीडियो में दिख रही जवानों की दयनीय हालत को पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) वेद प्रताप मलिक ने भी बहुत दुखद बताया। उन्होंने कहा, 'बहुत दुखद। सैनिकों को घर से ड्यूटी पर आने-जाने के लिए प्रायॉरिटी रिजर्वेशन देने की जरूरत है।' उन्होंने रेल मंत्रालय के साथ-साथ विभागीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी टैग किया।
अब तो सुन लो सरकार
सवाल है कि भारत सरकार उन लाखों बंग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की चिंता कर सकती है जो देश और समाज के लिए कई मायनों में खतरा बने हुए हैं, तो क्या देश के रक्षकों के लिए मिलिट्री कोच नहीं लगा सकती? पहले तो मिलिट्री कोच हर ट्रेन में हुआ करती थी, पता नहीं किस वजह से उन्हें हटा दिया गया। उम्मीद है कि सरकार अब देश की रक्षा में अपनी जिंदगी के बहुमूल्य वर्ष समर्पित करने वाले हमारे पूर्व सैन्य अफसरों की पीड़ा तो समझेगी।