Western Disturbance: जब दिशा चार हैं तो सिर्फ 'पश्चिमी विक्षोभ' ही क्यों होता है? जानिए वजह

Western Disturbance: चारों दिशाओं में से सिर्फ पश्चिम से आने वाला तूफान ही क्यों हमारे मौसम और खेती पर इतना असर डालता है? क्या वजह है कि इसे ही 'पश्चिमी विक्षोभ' कहा जाता है और बाकी दिशाओं से आने वाली हवाएं उतनी मायने नहीं रखतीं?

Priya Shandilya
अपडेटेड4 Sep 2025, 03:41 PM IST
जब दिशा चार हैं तो सिर्फ 'पश्चिमी विक्षोभ' ही क्यों होता है? जानिए वजह
जब दिशा चार हैं तो सिर्फ 'पश्चिमी विक्षोभ' ही क्यों होता है? जानिए वजह

Western Disturbance: मौसम के बारे में अक्सर हम सुनते हैं बारिश आई, बर्फ गिरी या अचानक ठंडी हवाएं चलने लगीं। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि मौसम विभाग ज्यादातर 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) का ही जिक्र करते हैं? तो सवाल उठता है कि जब चार दिशाएं हैं- उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम तो आखिर सिर्फ 'पश्चिमी विक्षोभ' ही क्यों?

पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है?

पश्चिमी विक्षोभ असल में एक तरह का मौसमी सिस्टम है, जो भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के आसपास बनता है। ये ठंडी हवाओं और नमी के साथ पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ता है और आखिरकार भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इसे 'पश्चिमी' कहा जाता है।

सिर्फ पश्चिम क्यों, बाकी दिशाओं से क्यों नहीं?

यह सिस्टम दरअसल पश्चिमी हवा की धारा (Westerlies) से जुड़ा है। धरती पर हवा चारों दिशाओं से चलती है, लेकिन ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी हवाओं का दबदबा है। यही हवाएं इन विक्षोभों को भारत तक खींच लाती हैं।

उत्तरी दिशा से आने वाले मौसम तंत्र अक्सर बहुत ठंडे होते हैं और साइबेरिया जैसे इलाकों तक सीमित रहते हैं। दक्षिण की तरफ से मानसून आता है, जिसे हम पश्चिमी विक्षोभ नहीं कहते, बल्कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं। पूर्वी हवाएं ज्यादातर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के आसपास असर डालती हैं। वैज्ञानिक रूप से देखें तो भारत में मौसम पर सबसे गहरा असर 'पश्चिमी विक्षोभ' का ही पड़ता है।

भारत पर इसका असर

पश्चिमी विक्षोभ भारत में सर्दियों की बारिश और बर्फबारी का बड़ा कारण है। उत्तर भारत में दिसंबर से मार्च तक अक्सर इसी की वजह से बारिश होती है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ की देन है। किसानों के लिए भी ये बेहद अहम है, क्योंकि रबी फसल जैसे गेहूं, चना और सरसों को समय पर पानी मिलता है। हालांकि कभी-कभी ये तेज बारिश या ओलावृष्टि भी लाता है, जिससे फसल को नुकसान पहुंच सकता है।

पश्चिमी विक्षोभ क्यों जरूरी है?

अगर पश्चिमी विक्षोभ न हो तो उत्तर भारत का मौसम बेहद सूखा और ठंडा रह जाएगा। सर्दियों में बर्फ और बारिश न होने से नदियों का जलस्तर भी गिर सकता है। यानी यह न सिर्फ मौसम के संतुलन बल्कि भारत की कृषि और जल संसाधनों के लिए भी जरूरी है।

अब साफ है कि दिशा चार हैं, पर पश्चिमी विक्षोभ ही इसलिए है क्योंकि हवा की प्रमुख धारा पश्चिम से ही आती है। यही धारा इसे लेकर भारत तक पहुंचती है और मौसम का खेल बदल देती है।

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