Hunger Psychology Explained: क्यों लोग भूख लगने पर गुस्सैल हो जाते हैं? अध्ययन में निकले चौंकाने वाले नतीजे

Hunger Psychology Explained: भूख सिर्फ पेट की जरूरत नहीं, बल्कि हमारे मूड और व्यवहार को भी प्रभावित करती है। रिसर्च बताती है कि जब हम अपनी भूख को पहचानते हैं, तभी चिड़चिड़ापन बढ़ता है। शरीर के संकेत समझना, समय पर खाना और संतुलन बनाए रखना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए जरूरी है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड17 Jan 2026, 07:23 PM IST
क्यों लोग भूख लगने पर गुस्सैल हो जाते हैं? (सांकेतिक तस्वीर)
क्यों लोग भूख लगने पर गुस्सैल हो जाते हैं? (सांकेतिक तस्वीर)(Pinterest)

मैंने अपने बेटे से कहा, “चलो, अब हमें चलना चाहिए।” लेकिन मेरा बेटा मेरी बात नहीं सुन रहा था। खेल के मैदान की रेत भुरभुरी थी और इसलिए वह अपने नए खिलौने वाले एक्सकेवेटर से उसे खोद रहा था।

इसके बाद मैं अपने दैनिक काम निपटाने लगी तभी उसकी खिलखिलाहट अचानक सिसकियों में बदल गई। मेरे बेटे को चोट नहीं लगी थी, बस वह बहुत परेशान था। जब मैंने अपना फोन देखा, तो पता चला कि उसके खाने का समय काफी पहले ही बीत चुका था और उसे बहुत भूख लग रही थी।

भूख लगते ही क्यों बदल जाता है मिजाज

हम चाहे कितने भी बड़े हो जाएं, शरीर को पर्याप्त भोजन न मिलने पर हम सभी चिड़चिड़े हो जाते हैं। मनुष्य हमेशा से इस अनुभव का सामना कर रहा है, लेकिन इस स्थिति को परिभाषित करने वाला विशिष्ट शब्द ‘हैंग्री’ ऑक्सफोर्ड के अंग्रेजी शब्दकोष में 2018 में ही शामिल हुआ।

इस शब्द का मतलब है भूख के कारण चिड़चिड़ा या बदमिजाज होना। हैरानी की बात यह है कि भूख रोजमर्रा की मनोदशा को कैसे प्रभावित करती है, इस पर अब तक बहुत कम शोध हुआ है।

भूख पर रिसर्च क्यों सीमित रही

भोजन और मनोदशा पर किए गए अधिकांश अध्ययनों में चयापचय संबंधी या खाने के विकारों से पीड़ित लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। शायद इसकी वजह यह है कि कई मनोवैज्ञानिकों ने परंपरागत रूप से भूख को एक बुनियादी शारीरिक प्रक्रिया के रूप में देखा है।

भूख पर इंसानी व्यवहार को समझने की कोशिश

द कन्वरसेशन में पब्लिश चिकित्सा मनोविज्ञान के प्रोफेसर नील्स क्रोमर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, यह पता लगाने का फैसला किया कि भूख लगने पर अलग-अलग लोग कैसी प्रतिक्रिया करते हैं। क्या और क्यों कुछ लोग भूख लगने पर भी खुद को संभाल पाते हैं।

जानवरों में भूख कैसे व्यवहार बदलती है

पशु जगत में भूख को अक्सर एक शक्तिशाली प्रेरक के रूप में देखा जाता है। भूखे चूहे भोजन पाने के लिए भारी वस्तुएं खींचते हैं या दीवारों पर चढ़ जाते हैं। जंगल में भूखे जानवर अपने वातावरण को और ज्यादा खंगालते हैं और कम ऊर्जा के खतरे से बचने के लिए बेचैनी दिखाते हैं।

इंसानों पर किया गया अध्ययन

लोगों में ऊर्जा स्तर, भूख और मनोदशा के रिश्ते को समझने के लिए नील्स की टीम ने 90 स्वस्थ वयस्कों के शरीर में ग्लूकोज स्तर की एक महीने तक निगरानी की। ग्लूकोज शरीर और मस्तिष्क के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। इस अध्ययन में प्रतिभागी एक सेंसर ऐप की मदद से हर कुछ मिनट में अपने ग्लूकोज स्तर की जांच कर सकते थे।

मूड और भूख को कैसे मापा गया

प्रतिभागियों से दिन में दो बार स्मार्टफोन पर अपनी मनोदशा दर्ज करने को कहा गया। इसमें उनसे यह पूछा गया कि वे कितने भूखे हैं या कितने संतुष्ट महसूस कर रहे हैं और साथ ही उनकी मौजूदा मनोदशा क्या है।

चौंकाने वाले नतीजे

इस अध्ययन के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया। पहला, लोगों की मनोदशा केवल तब खराब हुई जब उन्होंने खुद भूख महसूस की, न कि केवल कम ब्लड शुगर होने पर नहीं। दूसरा, जो लोग अपने ऊर्जा स्तर को बेहतर तरीके से समझ पाते थे, उनमें नकारात्मक भावनाएं कम देखने को मिलीं।

अंतर्संवेदन: शरीर और दिमाग के बीच की कड़ी

इससे पता चलता है कि ऊर्जा और मनोदशा के बीच एक अहम मनोवैज्ञानिक चरण होता है, जिसे वैज्ञानिक अंतर्संवेदन कहते हैं।

मस्तिष्क में भूख का संकेत हाइपोथैलेमस से मिलता है, जबकि भूख का सचेत अनुभव इंसुला से जुड़ा होता है, जो भावनाओं और स्वाद को भी नियंत्रित करता है।

इस अध्ययन में जिन लोगों का अंतर्संवेदन बेहतर था, उनमें मनोदशा के उतार-चढ़ाव कम दिखे। इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें भूख नहीं लगती थी, बल्कि वे खुद को बेहतर संभाल पाते थे।

मूड बिगड़ने का जीवन पर पड़ता है असर

यह अहम है, क्योंकि मनोदशा में अचानक बदलाव का असर परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों के रिश्तों पर पड़ सकता है। इससे गलत फैसले और आवेगपूर्ण व्यवहार बढ़ सकता है, जैसे अस्वास्थ्यकर खाने की ओर झुकाव।

शरीर की जरूरतों पर ध्यान देने से मन शांत रहता है। शरीर की आदर्श स्थिति से लंबे समय तक भटकाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

बच्चे क्यों अचानक नियंत्रण खो देते हैं

छोटे बच्चों के लिए अपने शरीर के संकेत समझना मुश्किल होता है। वे आसानी से भटक जाते हैं और भूख या प्यास को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे अचानक गुस्सा या रोना सामने आता है।

आज की तेज रफ्तार और डिजिटल दुनिया में कई वयस्क भी अपने ऊर्जा स्तर को नजरअंदाज कर देते हैं। भोजन छोड़ देना इसका एक आम कारण है।

नियमित भोजन और गतिविधि क्यों जरूरी

नियमित खाना, व्यायाम और शारीरिक गतिविधि भूख को बेहतर तरीके से पहचानने में मदद करती है और ऊर्जा चयापचय को संतुलित रखती है। अधिकांश समय भूख का असर मामूली होता है, लेकिन खेल के मैदान की उस घटना ने यह सिखाया कि खाने-पीने की जरूरतों का ध्यान समय रहते रखना चाहिए। इसके अलावा, व्यायाम और शारीरिक गतिविधि भूख को महसूस करने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं और ऊर्जा चयापचय को बेहतर कर सकते हैं।

शायद हम सभी को यह समझने की जरूरत है कि भूख लगने पर चिड़चिड़ापन कोई कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर का संकेत है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सHunger Psychology Explained: क्यों लोग भूख लगने पर गुस्सैल हो जाते हैं? अध्ययन में निकले चौंकाने वाले नतीजे
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सHunger Psychology Explained: क्यों लोग भूख लगने पर गुस्सैल हो जाते हैं? अध्ययन में निकले चौंकाने वाले नतीजे