ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म विंजो के संस्थापक पावन नंदा और सौम्या सिंह राठौर को ED गिरफ्तार कर चुकी है और विंजो कंपनी विवादों में है। ED का आरोप है कि विंजो ने खिलाड़ियों के लगभग 43 करोड़ रुपए वापस नहीं किए, जबकि भारत में हाल ही में रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया गया था। ED का दावा है कि प्लेटफॉर्म खिलाड़ियों को वास्तविक खिलाड़ियों के बजाय एल्गोरिदम से मुकाबला करवाता था, जिसकी जानकारी उपयोगकर्ताओं को नहीं दी जाती थी।
ED का आरोप है कि विंजो खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाता था कि वे किसी असली प्लेयर के खिलाफ गेम खेल रहे हैं, जबकि कई मामलों में उनका मुकाबला एक बॉट, यानी कंप्यूटर-नियंत्रित प्रोग्राम से होता था। यानी स्क्रीन पर जो अंकित, वैभव, राहुल या शुभम दिखाई देता था, वह असली इंसान नहीं, एक एल्गोरिद्म था जिसे खिलाड़ी को हराने के लिए डिजाइन किया गया था।
अगर आपने लूडो के गेम में 50 रुपए की बाजी लगाकर खेलना शुरू किया तो, कंप्यूटर या मोबाइल दिखाता था कि आप किसी असली प्लेयर से खेल रहे हैं। लेकिन हकीकत में सामने वाला खिलाड़ी एक बॉट था, यानी सिस्टम में पहले से इस तरह का प्रोग्राम सेट किया जाता है कि आप हारें और कंप्यूटर जीते। जब आप हारते थे, तो आपके 50 रुपए विंजो कंपनी के पास चले जाते थे। इस तरह से कंपनी लगातार जीतती रही और खिलाड़ियों का पैसा सिस्टम में फंसता गया। ED के मुताबिक विंजो ने 14 महीनों में लगभग 177 करोड़ रुपए इस गलत तरीके से जुटाए।
सरकार ने गेमिंग कंपनियों को यह निर्देश दिया था कि अगर कोई गेमिंग सेवा बंद हो या लेनदेन में दिक्कत आए तो खिलाड़ियों के वॉलेट में पड़े पैसे वापस किए जाएं। आरोप है कि विंजो ने करीब 43 करोड़ रुपए अपने पास ही रोक लिए और रिफंड नहीं किया। ऐसे मामलों में व्यापारिक विवाद के साथ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का केस बन जाता है। इसी आधार पर ED ने PMLA के तहत कार्रवाई की है।
बीते सप्ताह ED ने विंजो और दूसरी ऑनलाइन गेमिंग कंपनी गेम्सक्राफ्ट के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। ईडी की जांच में सामने आया कि विंजो भारत स्थित प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशों में रियल-मनी गेमिंग चला रहा था। छापेमारी के बाद ED ने कंपनी के लगभग 505 करोड़ रुपए के बॉन्ड, FD और म्यूचुअल फंड को फ्रीज कर दिया है। साथ ही यह आरोप भी लगा है कि विदेशी निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए अमेरिका और सिंगापुर भेजे गए। इस मामले पर विंजो ने बयान जारी कर कहा कि उनका प्लेटफॉर्म पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है और वे सभी कानूनों का पालन करते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में हाल के वर्षों में भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में खिलाड़ियों के भरोसे और पारदर्शिता की सुरक्षा बेहद जरूरी है। विंजो पर लगे आरोप इस पूरे सेक्टर पर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि यह साबित हो जाता है कि कंपनी ने जानबूझकर परिणामों को मोड़ा, तो गेमिंग रेगुलेशन की दिशा भी देश में बदल सकती है।
पावन नंदा भारतीय एंटरप्रेन्योर हैं और विंजो के फाउंडर हैं। उन्होंने एनएसआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) कोलकाता से एमबीए किया है। सौम्या सिंह राठौर भी विंजो की फाउंडर्स हैं। सौम्या सिंह ने 2005 में बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से एप्लाइड क्लिनिकल साइकोलॉजी पढ़ी और बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से मास्टर इन ऑर्गेनाइजेशन, इंडस्ट्रियल एंड कंज्यूमर साइकोलॉजी किया।
विंजो गेम्स की स्थापना साल 2018 में सौम्या ने पावन नंदा के साथ मिलकर की थी। पावन नंदा सौम्या के साथ काम करते थे। पावन ने इससे पहले बैकपैकर ट्रैवल स्टार्टअप ZO Rooms की स्थापना की थी लेकिन उनका यह कारोबार चल नहीं पाया था। साल 2019 तक विंजो गेम्स प्लेटफॉर्म पर 2 करोड़ से ज्यादा यूजर हो गए थे। वहीं 200 करोड़ से ज्यादा मासिक लेनदेन होने लगे। इसके बाद विंजो गेम्स लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। साल 2020 में विंजो गेम्स ने भारतीय क्रिकेट के दिग्गज एमएस धोनी को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया था। विंजो गेम्स ने शाहरुख खान की आईपीएल फ्रेंचाइजी KKR के साथ एक मल्टी-ईयर स्पॉन्सरशिप डील भी की थी।
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