Mahashivratri 2026: क्या भद्रा काल का पूजा पर पड़ेगा असर? डिटेल में जानें शुभ जलाभिषेक समय और पूजा मुहूर्त

महाशिवरात्रि 2026, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भद्रा काल रहेगा, लेकिन उसका वास पाताल लोक में होने से पूजा में कोई बाधा नहीं मानी जाएगी। श्रद्धालु व्रत, जलाभिषेक और रात्रि पूजा कर सकते हैं। निशिता काल और दिन के शुभ मुहूर्त विशेष फलदायी रहेंगे।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड11 Feb 2026, 12:33 PM IST
Mahashivratri 2026: क्या भद्रा काल का पूजा पर पड़ेगा असर? डिटेल में जानें शुभ जलाभिषेक समय और पूजा मुहूर्त
Mahashivratri 2026: क्या भद्रा काल का पूजा पर पड़ेगा असर? डिटेल में जानें शुभ जलाभिषेक समय और पूजा मुहूर्त

महाशिवरात्रि वह पवित्र रात है जब श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात भर जागरण करते हैं और मंदिर जाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में इस पर्व को लेकर एक खास ज्योतिषीय बात चर्चा में है, वह है भद्रा काल की उपस्थिति।

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हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल को आमतौर पर अशुभ माना जाता है और इस दौरान शुभ कार्य करने से बचा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस वर्ष महाशिवरात्रि की पूजा पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा और जलाभिषेक व पूजा का सही समय क्या होगा।

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि

साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र रात्रि माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, मंत्र जाप करते हैं और पूरी रात भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं।

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भद्रा काल का समय और अवधि

पंचांग के अनुसार भद्रा 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इसकी कुल अवधि लगभग 12 घंटे की होगी।

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हालांकि एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में माना जा रहा है, पृथ्वी लोक में नहीं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भद्रा पाताल लोक में होती है तो वह पृथ्वी पर किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के लिए बाधक नहीं मानी जाती। इसलिए श्रद्धालुओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पूजा, अर्चना और मंदिर दर्शन सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।

चतुर्दशी तिथि और जलाभिषेक के शुभ समय

चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। शिवलिंग जलाभिषेक के लिए दिन के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक
  • दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक
  • तीसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक

इन तीनों समय में जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करना शुभ माना गया है। मध्यरात्रि की विशेष पूजा जिसे निशिता काल पूजा कहा जाता है, 16 फरवरी को रात 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 17 मिनट के बीच होगी। यह समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

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चार प्रहर की रात्रि पूजा का समय

कई श्रद्धालु रात को चार प्रहर में विभाजित कर पूजा करते हैं। इनके समय इस प्रकार हैं:

  • पहला प्रहर शाम 6 बजकर 39 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक
  • दूसरा प्रहर रात 9 बजकर 45 मिनट से 16 फरवरी को रात 12 बजकर 52 मिनट तक
  • तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 52 मिनट से सुबह 3 बजकर 59 मिनट तक
  • चौथा प्रहर सुबह 3 बजकर 59 मिनट से सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक

हर प्रहर का अपना धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु इन समयों में अभिषेक करते हैं, ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करते हैं। इस प्रकार, भद्रा काल महाशिवरात्रि के दौरान जरूर आ रहा है, लेकिन उसका पाताल लोक में होना इसे अशुभ नहीं बनाता। श्रद्धालु निश्चिंत होकर व्रत, जलाभिषेक और रात्रि पूजा कर सकते हैं तथा दिए गए शुभ मुहूर्त का पालन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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