Phalguna Amavasya kab ki hai: क्या इस बार फाल्गुन अमावस्या पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? जानिए शुभ मुहूर्त और सही तारीख

फाल्गुन अमावस्या पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किए जाते हैं। 17 फरवरी 2026 को यह पर्व मनाया जाएगा। व्रत, दान, दीपदान और मंत्र जाप का विशेष महत्व है। सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड16 Feb 2026, 08:31 AM IST
Phalguna Amavasya 2026: क्या इस बार फाल्गुन अमावस्या पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? जानिए शुभ मुहूर्त और सही तारीख
Phalguna Amavasya 2026: क्या इस बार फाल्गुन अमावस्या पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? जानिए शुभ मुहूर्त और सही तारीख

हिंदू पंचांग में अमावस्या यानी नए चंद्रमा का दिन बहुत आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसे पितरों के सम्मान में पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म करने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। जब अमावस्या फाल्गुन महीने में आती है, तो उसे फाल्गुन अमावस्या कहा जाता है।

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इसे दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष यानी चंद्रमा के घटते चरण के समाप्त होने का संकेत देता है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं, पितरों के लिए तर्पण करते हैं और दान-पुण्य करते हैं ताकि उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिले।

फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष फाल्गुन अमावस्या मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार शुभ समय इस प्रकार है:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 फरवरी शाम 5:30 बजे
  • स्नान का समय: सुबह 5:16 बजे से 6:07 बजे तक
  • अमृत काल मुहूर्त: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक

क्या फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण दिखाई देगा?

इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या के दिन पड़ेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के सामने आकर उसे पूरी तरह नहीं ढकता और “रिंग ऑफ फायर” जैसा दृश्य दिखाई देता है।

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हालांकि यह दृश्य बहुत सुंदर होता है, लेकिन इसका मुख्य चरण थोड़े समय के लिए ही रहता है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियम और सूतक आदि लागू नहीं होंगे।

फाल्गुन अमावस्या के प्रमुख उपाय और अनुष्ठान

फाल्गुन अमावस्या मुख्य रूप से पितरों के सम्मान में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का दिन है। इस दिन लोग भोजन, जल और प्रार्थना अर्पित कर पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति की कामना करते हैं।

यह दिन काल सर्प दोष और शनि दोष जैसे ग्रह दोषों को शांत करने के लिए भी शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और दान करते हैं। भोजन, कपड़े, तिल और उड़द दाल का दान ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को किया जाता है। गाय को भोजन कराना भी बहुत शुभ माना जाता है।

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घर में या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और ईश्वर की कृपा पाने के लिए अच्छा माना जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करना, मंत्र जाप करना और ध्यान करना भी लाभदायक माना जाता है।

शनि चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना आम प्रथा है। पवित्र नदियों में स्नान करना, मंदिर जाना और योग्य पंडित के मार्गदर्शन में पितृ तर्पण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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