World Environment Day 2025: पर्यावरण के लिए खतरा हैं रोजाना इस्तेमाल में आ रही ये चीजें, जानिए कैसे

सैनिटरी पैड, परफ्यूम और वॉशिंग पाउडर जैसे प्रोडक्ट्स का रोजाना इस्तेमाल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इन प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल जल, वायु और मिट्टी को प्रदूषित करते हैं। प्राकृतिक विकल्प अपनाना जरूरी है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड5 Jun 2025, 10:13 AM IST
World Environment Day 2025
World Environment Day 2025(Meta AI)

World Environment Day 2025: आज के समय में हम हर दिन कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं जो हमारी सुविधा को तो बढ़ाती हैं, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। सैनिटरी पैड, परफ्यूम, टूथपेस्ट और वॉशिंग पाउडर जैसी चीजें हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी हैं। इनका इस्तेमाल जरूरी तो है, लेकिन इनके पीछे छिपे पर्यावरणीय खतरों को हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

इन प्रोडक्ट्स के निर्माण में जो केमिकल्स, प्लास्टिक और आर्टिफीशिल खुशबुएं इस्तेमाल होती हैं, वे मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित करते हैं। इनके अवशेष न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जीव-जंतुओं और इंसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं। इसी क्रम में चलिए जानते हैं कि ये चीजें पर्यावरण को कैसे नुकसान पहुंचा रही हैं।

जानिए इन चीजों के बारे में

सैनिटरी पैड: सैनिटरी पैड्स में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक और सुपर एब्जॉर्बेंट पॉलिमर बायोडिग्रेडेबल नहीं होते। एक पैड को गलने में 500-800 साल लग सकते हैं। जब इन्हें खुले में फेंका जाता है या जलाया जाता है, तो इससे टॉक्सिक गैसें निकलती हैं जो हवा को प्रदूषित करती हैं। साथ ही, ये जल स्रोतों को भी दूषित कर सकते हैं।

परफ्यूम और डिओडरेंट: परफ्यूम और डिओडरेंट में वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) पाए जाते हैं। ये गैस वातावरण में जाकर ओजोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं और हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं। इनके छिड़काव से इनडोर और आउटडोर दोनों ही तरह की वायु प्रदूषित होती है, जो सांस संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है।

टूथपेस्ट: कई टूथपेस्ट्स में माइक्रोबीड्स (छोटे प्लास्टिक कण) और ट्राइक्लोसन जैसे केमिकल्स होते हैं। ये दांतों को तो साफ करते हैं, लेकिन नालियों से होते हुए जल स्रोतों में पहुंचकर वहां के जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। मछलियों और समुद्री जीवों के शरीर में ये प्लास्टिक जमा हो जाता है, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।

वॉशिंग पाउडर और डिटर्जेंट: वॉशिंग पाउडर में मौजूद फॉस्फेट्स और अन्य रसायन नदियों और तालाबों में जाकर शैवाल की ज्यादा वृद्धि कर देते हैं। इससे जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जो जलीय जीवों के लिए खतरनाक है। इसके अलावा, ये केमिकल्स मिट्टी को भी नुकसान पहुंचाते हैं और पेयजल को विषैला बना सकते हैं।

हमारी छोटी-छोटी आदतें पर्यावरण पर बड़ा असर डाल सकती हैं। जरूरी है कि हम जागरूक बनें और इन प्रोडक्ट्स के ज्यादा प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाएं। जैसे कि कपड़े वाले सैनिटरी पैड, हर्बल टूथपेस्ट, प्राकृतिक डिओडरेंट और इको-फ्रेंडली डिटर्जेंट का इस्तेमाल करके हम पर्यावरण को बचा सकते हैं।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होमट्रेंड्सWorld Environment Day 2025: पर्यावरण के लिए खतरा हैं रोजाना इस्तेमाल में आ रही ये चीजें, जानिए कैसे
More