America-Venezuela tension: कच्चा तेल, जिसे अक्सर ब्लैक गोल्ड कहा जाता है, एक बार फिर दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ गया है। वजह है अमेरिका की वेनेजुएला पर की गई बड़ी सैन्य कार्रवाई। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस देश को लेकर अमेरिकी दावे, गिरफ्तारी और सत्ता परिवर्तन की बातें सामने आते ही ग्लोबल मार्केट में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका का दावा और मादुरो की गिरफ्तारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। उनके मुताबिक वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया है। ट्रंप ने दोनों पर ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को-टेररिज्म से जुड़े आरोप लगाए और कहा कि उन पर न्यूयॉर्क की अदालत में मुकदमा चलेगा।
वेनेजुएला में अब अमेरिकी तेल कंपनियों की एंट्री?
ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक सत्ता का ट्रांजिशन नहीं होता, तब तक अमेरिका वेनेजुएला का अंतरिम प्रशासन संभालेगा। इस दौरान अमेरिकी तेल कंपनियों को देश में तैनात किया जाएगा। यहीं से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दे दिया।
क्या बढ़ेगी तेल की कीमतें?
एनालिस्ट्स का मानना है कि इतने बड़े तेल उत्पादक देश में अस्थिरता का असर सीधे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर पड़ सकता है। अगर सप्लाई में रुकावट आती है या नियंत्रण को लेकर खींचतान बढ़ती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना लगभग तय माना जा रहा है।
शीर्ष तेल भंडार वाले देश
US Energy Information Administration के आंकड़ों के मुताबिक, तेल भंडार के मामले में वेनेजुएला पहले स्थान पर है। इसके बाद सऊदी अरब, ईरान, कनाडा, इराक और कुवैत जैसे देश आते हैं। अमेरिका खुद भी इस लिस्ट में टॉप-10 में शामिल है, लेकिन वेनेजुएला का भंडार सबसे बड़ा है।
अमेरिका की पुरानी रणनीति
तेल भंडार वाले देशों में हस्तक्षेप करना अमेरिका के लिए नया नहीं है। इराक, ईरान और लीबिया जैसे देशों में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। वेनेजुएला का कहना है कि यह कदम उनके तेल भंडार पर कब्जा करने की कोशिश है।
ड्रग्स के आरोपों पर भी सवाल
एक BBC रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला को 2025 की अमेरिकी DEA रिपोर्ट में फेंटेनाइल के स्रोत देश के रूप में नामित नहीं किया गया था। इसके बावजूद ड्रग्स और नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए गए, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
तेल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश की आधे से ज्यादा सरकारी आय तेल निर्यात से आती है। ऐसे में तेल सेक्टर पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव सीधे जनता और सरकारी सिस्टम को प्रभावित करता है।