
साल 2025 वैश्विक राजनीति में चुनावों या सत्ता परिवर्तन से ज्यादा नेताओं के बयानों के कारण याद किया जाएगा। दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए कुछ बयान ऐसे थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सैन्य संतुलन और वैचारिक ध्रुवीकरण को नई दिशा दी। आतंकवाद, युद्ध, पहचान और शांति जैसे मुद्दों पर दिए गए इन बयानों ने न केवल देशों की नीतियों को प्रभावित किया, बल्कि वैश्विक बहस का स्वर भी बदल दिया।
दिसंबर में रूस दौरे पर आए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ साझा मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान वैश्विक सुर्खियों में रहा। भारत-रूस समिट के दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, भारत न्यूट्रल नहीं है, भारत का पक्ष है और वह पक्ष शांति का है। यह बयान ऐसे समय आया जब दुनिया यूक्रेन, पश्चिम एशिया और एशिया-प्रशांत में बढ़ते तनाव से जूझ रही थी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह शांति के हर प्रयास के साथ खड़ा है, लेकिन आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं करेगा।
नवंबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सानए ताकाइची के संसद में दिए बयान ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि अगर जापान के अस्तित्व पर खतरा आया तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगी। यह टिप्पणी चीन के वियतनाम क्षेत्र में बढ़ते दखल के संदर्भ में थी। इसके बाद बीजिंग ने कड़ा विरोध जताया, बयान वापस लेने की मांग की और दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास तेज हो गए। जापान ने चीन पर फाइटर जेट्स को रडार लॉक करने का आरोप भी लगाया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2025 में एक से ज्यादा बयानों को लेकर विवादों में रहे। नवंबर में उन्होंने अमेरिका में इंडियन शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही, जिसे कई नेटिव समूहों ने अपमानजनक और नस्लीय बताया। इसके अलावा ट्रंप ने यह दावा भी किया कि उनकी कूटनीतिक पहल के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टल गया। इस बयान ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी और ट्रंप की वैश्विक मध्यस्थ की छवि को फिर चर्चा में ला दिया।
अक्टूबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नोबेल शांति पुरस्कारों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कभी-कभी शांति के लिए कुछ न करने वालों को भी पुरस्कार मिल जाता है। यह बयान वेनेजुएला की विपक्षी नेता को नोबेल दिए जाने के संदर्भ में आया। वहीं सितंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पीस प्लान पर साफ कहा कि फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता समझौते का हिस्सा नहीं होगी। उन्होंने दो-टूक कहा कि इजरायल फिलिस्तीनी राज्य का विरोध जारी रखेगा और गाजा पर सैन्य नियंत्रण बनाए रखेगा।
फरवरी 2025 में इटली की प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी ने कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में दक्षिणपंथ का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि वामपंथ दोहरे मापदंड अपनाता है, जबकि कंजर्वेटिव ताकतें राष्ट्रीय पहचान और आजादी की रक्षा कर रही हैं। विपक्ष ने इस मंच को नव-फासीवादी करार दिया, लेकिन मेलोनी का बयान यूरोप में वैचारिक बहस का केंद्र बन गया। 2025 ने साबित कर दिया कि वैश्विक राजनीति में अब शब्द भी हथियार हैं।
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