आराम से बैठकर केवल अपनी सांसों पर ध्यान दें। जब भी मन भटकने लगे, धीरे से ध्यान फिर से सांसों पर ले आएं।
किसी एक चीज़, आवाज़, सांस या विचार पर पूरा ध्यान लगाएँ। यह अभ्यास दिमाग को भटकने से रोककर वर्तमान में बनाए रखता है।
किसी पसंदीदा या बार-बार की जाने वाली गतिविधि में पूरी तरह ध्यान लगाएँ। जैसे ड्रॉइंग करना, गार्डनिंग करना या वॉक करना। इससे मन शांत होता है और ध्यान केंद्रित रहता है।
इस तकनीक में वर्तमान पल पर ध्यान दिया जाता है। इसमें शरीर की संवेदनाओं और भावनाओं को बिना जज किए सिर्फ महसूस किया जाता है।
यह आत्म-चिंतन, स्पष्टता और गहरी जुड़ाव के लिए किया जाता है। जैसे कुंडलिनी मेडिटेशन, जो मन और शरीर को जोड़ने पर जोर देता है।